प्रयागराज में बातचीत के दौरान कांग्रेस सांसद ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के समय भाजपा ने राजधानी को प्रदूषण मुक्त बनाने का भरोसा दिया था। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई क्षेत्र भी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। ऐसे में दिल्ली के साथ-साथ आसपास के राज्यों में प्रदूषण की स्थिति को नियंत्रित करना भी जरूरी है। इसके बावजूद वायु प्रदूषण और यमुना नदी की सफाई के मोर्चे पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
प्रमोद तिवारी ने दिल्ली में भाजपा के तीन स्तरों पर शासन का उल्लेख करते हुए कहा कि नगर निगम, दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार में एक ही पार्टी की सत्ता होने के बावजूद प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। उन्होंने इसे सरकार के दावों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर बताते हुए कहा कि लोगों को प्रदूषण से राहत नहीं मिल पा रही है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि राजधानी की हवा इतनी खराब हो चुकी है कि लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने दिल्ली की स्थिति को गैस चैंबर जैसी बताते हुए कहा कि प्रदूषण के कारण बीमारियां बढ़ रही हैं और लोगों की जीवन प्रत्याशा प्रभावित हो रही है। उनके मुताबिक, इस समस्या की जिम्मेदारी केवल दिल्ली सरकार पर नहीं डाली जा सकती, बल्कि केंद्र सरकार को भी जवाबदेह होना चाहिए।
प्रदूषण के मुद्दे के साथ ही तिवारी ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आम वाहन चालकों की शिकायत है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है। उनका तर्क था कि आम व्यक्ति बड़ी मुश्किल से अपनी जरूरतों के लिए कार खरीदता है। यदि ईंधन के कारण वाहन की औसत दूरी तय करने की क्षमता कम होती है, तो उसे अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के वाहनों के इंजन पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की भी जांच कराने की मांग की। तिवारी ने कहा कि इस मामले में केवल लोगों की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि तकनीकी और आर्थिक पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस सांसद ने इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की। उनका कहना था कि जांच के माध्यम से इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के प्रभावों और उससे जुड़ी शिकायतों की वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए।
इस दौरान प्रमोद तिवारी ने भाजपा पर संविधान की मूल भावना के विपरीत काम करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा तैयार संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है, जबकि भाजपा पर उन्होंने धर्म के आधार पर समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया।
उन्होंने भाजपा की नीतियों की तुलना अंग्रेजों की बांटो और राज करो की नीति से की। तिवारी के अनुसार, इस तरह की राजनीति से देश का सामाजिक ताना-बाना कमजोर होता है और समाज में विभाजन बढ़ता है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों को भी अपनी ऐसी नीतियों के कारण देश छोड़ना पड़ा था और भाजपा को भी एक दिन सत्ता से जाना पड़ेगा।
प्रमोद तिवारी के इस बयान में दिल्ली के प्रदूषण, यमुना की स्थिति, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल और सामाजिक विभाजन जैसे मुद्दे शामिल रहे। उनके आरोपों के केंद्र में पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने में सरकारों की जवाबदेही और आम नागरिकों पर पड़ने वाला प्रभाव रहा।
