यह मामला टीवीके विधायक मधर बदरुद्दीन उर्फ मुस्तफा की शिकायत के बाद सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया था कि विपक्षी दल के कुछ पदाधिकारियों ने प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरकार के खिलाफ वोट देने के लिए उन्हें धन का प्रलोभन दिया था। मुस्तफा ने दावा किया था कि सत्तारूढ़ दल के विधायकों को अपने पक्ष से हटाने और मुख्यमंत्री विजय की सरकार को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
बुधवार को मदुरै हवाई अड्डे पर बातचीत के दौरान मुस्तफा ने इन आरोपों को सार्वजनिक किया था। इसके बाद राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई। सत्तारूढ़ टीवीके की ओर से भी विपक्षी दलों पर धनबल के माध्यम से विधायी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करने के आरोप लगाए गए। हालांकि, रिश्वत देने और सरकार गिराने की कथित योजना से जुड़े आरोपों की पुष्टि अभी जांच के अधीन है।
शिकायत के आधार पर मदुरै सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई करते हुए शुक्रवार सुबह पीएम मन्नन को गिरफ्तार किया था। वह अन्नाद्रमुक के उप प्रचार सचिव भी हैं। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विश्वनाथपुरम स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय ले जाया गया, जहां पुलिस उपायुक्त दिव्या की निगरानी में जांच अधिकारियों ने उनसे आठ घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की।
जांच के दौरान पुलिस ने मन्नन के मोबाइल फोन पर हुई बातचीत, संचार रिकॉर्ड और उनके संपर्कों से संबंधित जानकारियों की पड़ताल की। जांचकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि कथित तौर पर विधायकों को प्रभावित करने की कोशिश में किन लोगों की भूमिका हो सकती है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या इस मामले में अन्य राजनीतिक पदाधिकारी या नेता शामिल थे।
शुक्रवार को पूछताछ पूरी होने के बाद मन्नन को जिला अदालत में विशेष न्यायाधीश आर. जोसेफ जॉय के समक्ष पेश किया गया। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने उनकी गिरफ्तारी की परिस्थितियों पर सवाल उठाए। अदालत ने विशेष रूप से यह जानना चाहा कि जब मन्नन को 7 नवंबर को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, तो उन्हें 6 नवंबर को ही हिरासत में क्यों लिया गया।
अदालत ने इसके बाद मन्नन को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही उन्हें शनिवार को दोबारा जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होने का निर्देश दिया गया। अदालत के आदेश का पालन करते हुए मन्नन शनिवार को फिर मदुरै के विश्वनाथपुरम स्थित सेंट्रल क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुंचे। यहां अधिकारियों ने उनसे मामले से जुड़े आरोपों और कथित संपर्कों के संबंध में पूछताछ जारी रखी।
मुख्यमंत्री विजय की सरकार को अस्थिर करने की कथित कोशिशों से जुड़ा यह मामला अब पुलिस जांच के अगले चरण में पहुंच गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विधायकों को आर्थिक लाभ देने का कोई संगठित प्रयास हुआ था या नहीं। इसके अलावा कथित योजना में अन्य लोगों की भूमिका और संचार माध्यमों से जुड़े साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। फिलहाल पीएम मन्नन से पूछताछ जारी है और मामले में आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।
