प्रस्तावित कानून के दायरे में ऐसे प्लेटफॉर्म शामिल किए जा सकते हैं जिन्हें बच्चों के लिए नुकसानदायक माना जाता है। रिपोर्ट में Roblox Snapchat और TikTok जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म का उल्लेख किया गया है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रतिबंध किन-किन ऐप और सेवाओं पर लागू होगा। सरकार की ओर से अंतिम सूची और नियमों की पूरी जानकारी सामने आना बाकी है। इसलिए फिलहाल इन सभी प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगना तय नहीं माना जा सकता।
नॉर्वे ने इससे पहले अप्रैल में संकेत दिया था कि वह साल के अंत तक इस विषय पर संसद में विधेयक पेश करेगा। प्रस्ताव का प्रमुख उद्देश्य 16 साल की उम्र पूरी होने तक बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को सीमित करना है। सरकार का मानना है कि कम उम्र में डिजिटल प्लेटफॉर्म का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों की सुरक्षा और उनके विकास से जुड़े सवाल खड़े करता है। ऐसे में उम्र के आधार पर नियम बनाकर बच्चों को ऑनलाइन दुनिया के संभावित जोखिमों से बचाने की कोशिश की जा रही है।
इस प्रस्ताव में कंपनियों की जिम्मेदारी भी अहम होगी। रिपोर्ट के अनुसार सोशल मीडिया और संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को यूजर्स की उम्र की पुष्टि करने की व्यवस्था लागू करनी पड़ सकती है। यदि कोई कंपनी उम्र की जांच करने से जुड़ी अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करती है तो उसे जुर्माने या अन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि नियमों के उल्लंघन पर दंड का पूरा स्वरूप और उसके लागू होने की प्रक्रिया स्पष्ट होना अभी बाकी है।
बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने की दिशा में नॉर्वे अकेला देश नहीं है। ऑस्ट्रेलिया इस मामले में पहले ही बड़ा कदम उठा चुका है। वहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध से जुड़े नियम लागू किए गए हैं। इसके बाद संबंधित कंपनियों को उम्र की पुष्टि करने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने पड़े। फेसबुक और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म भी इस तरह की व्यवस्था से प्रभावित हुए हैं।
दूसरी ओर ऑस्ट्रिया ब्राजील और कनाडा जैसे देशों में भी बच्चों के डिजिटल इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग स्तर पर कानूनी पहल की गई है। इन प्रयासों से स्पष्ट है कि दुनियाभर की सरकारें बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर अधिक सतर्क हो रही हैं। सोशल मीडिया के साथ गेमिंग प्लेटफॉर्म पर भी ध्यान दिए जाने से यह बहस और व्यापक हो गई है।
हालांकि सोशल मीडिया और गेम्स पर उम्र आधारित प्रतिबंध लगाने को लेकर कई सवाल भी हैं। नियमों को लागू करने के लिए उम्र की सही पहचान करना जरूरी होगा। साथ ही बच्चों की निजता और ऑनलाइन सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना भी चुनौती रहेगी। अब सभी की नजर नॉर्वे सरकार के प्रस्तावित विधेयक पर है। संसद में पेश होने और उसके प्रावधान स्पष्ट होने के बाद ही पता चलेगा कि किन प्लेटफॉर्म पर रोक लगेगी और कंपनियों को किन नियमों का पालन करना होगा।
