यह शिकायत पूर्व कांग्रेस नेता आदित्य पासवान की ओर से दर्ज कराई गई थी। उन्होंने अपनी लिखित शिकायत में आरोप लगाया कि IIT पटना के रजिस्ट्रार ने 19 सितंबर को सोशल मीडिया पर एक टिप्पणी पोस्ट की थी। इसमें कथित तौर पर लिखा गया था, ‘काबिल मत बनो, दलित बनो, कामयाबी झक मारकर पीछे आएगी।’ इस टिप्पणी को लेकर आदित्य पासवान ने आपत्ति जताते हुए इसे दलित समाज की मेहनत, प्रतिभा और संघर्ष का अपमान बताया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी किसी एक व्यक्ति की भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे समाज के एक बड़े वर्ग के सम्मान को ठेस पहुंचती है। आदित्य पासवान ने अपनी शिकायत में कहा कि वह स्वयं दलित समुदाय से आते हैं और इस कथित बयान से उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी आघात पहुंचा है। उनके मुताबिक, देश के करोड़ों दलित नागरिकों की मेहनत, योग्यता और सामाजिक संघर्ष को इस तरह की टिप्पणी के माध्यम से कमतर दिखाने का प्रयास किया गया है।
आदित्य पासवान ने आरक्षण के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उनका कहना है कि आरक्षण किसी राजनीतिक दल या सरकार की ओर से दिया गया उपहार नहीं है, बल्कि यह सदियों से चली आ रही सामाजिक असमानता और भेदभाव को दूर करने के उद्देश्य से संविधान में किया गया प्रावधान है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य समाज के वंचित वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें शिक्षा, रोजगार तथा सामाजिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति किसी जाति विशेष के खिलाफ नहीं है। उन्होंने अपनी लड़ाई को संविधान, सामाजिक सम्मान और समानता के अधिकार से जुड़ा बताया है। उनका मानना है कि सार्वजनिक और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने वाले व्यक्तियों के बयानों और व्यवहार का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे पदों पर बैठे लोगों की ओर से की गई कथित टिप्पणियां सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।
इस मामले में IIT पटना के रजिस्ट्रार की प्रशासनिक भूमिका भी चर्चा में है। किसी प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ इस तरह की शिकायत दर्ज होने से संस्थान से जुड़े मामले पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है। हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों की पुष्टि नहीं है। मामले में लगाए गए आरोपों की सच्चाई पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायत के आधार पर 5 नवंबर को पटना के एससी-एसटी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस IIT पटना के रजिस्ट्रार अवलेन्द्र कुमार ठाकुर से जल्द पूछताछ कर सकती है। जांच के दौरान कथित सोशल मीडिया पोस्ट, उसकी तारीख और उससे संबंधित परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी।
फिलहाल इस मामले में पुलिस की जांच महत्वपूर्ण है। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम ने शैक्षणिक संस्थानों में सामाजिक संवेदनशीलता, समानता और जिम्मेदार सार्वजनिक अभिव्यक्ति को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
