शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि विधि विधान से पूजा करने पर घर में सुख समृद्धि आती है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है। पूजा की शुरुआत से पहले भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर को साफ स्थान पर स्थापित करें। इसके बाद पूजा की थाली में रोली कुमकुम अक्षत फूल और फूलों की माला रखें। धूप दीपक घी रुई की बत्ती और गंगाजल भी पूजा के लिए तैयार रखें। इसके साथ ही शुद्ध जल से भरा पात्र चंद्रदेव की पूजा के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।
पूजन सामग्री में फल मिठाई बताशे दूध चावल चीनी और मेवे भी शामिल करें। शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने की विशेष परंपरा है इसलिए इसके लिए दूध चावल चीनी और अपनी पसंद के मेवे पहले से रख लें। पूजा में पान सुपारी नारियल और कलश का भी उपयोग किया जा सकता है। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार तुलसी दल भी रखें। पूजा के लिए थाली आसन और जल से भरा चांदी पीतल या तांबे का कलश तैयार कर लें। यदि आप इस दिन दान करना चाहते हैं तो अनाज वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा की व्यवस्था भी कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और भक्तों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसी विश्वास के चलते कई लोग इस रात जागरण करते हैं और देवी की आराधना में समय बिताते हैं। पूजा के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु को फूल फल और मिठाई अर्पित करें। इसके बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र जाप और स्तोत्र पाठ कर सकते हैं। कनकधारा स्तोत्र का पाठ और ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का 108 बार जाप करना धार्मिक परंपराओं में शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे धन धान्य और समृद्धि की कामना की जाती है।
शरद पूर्णिमा पर चंद्रदेव की पूजा का भी विशेष महत्व है। रात में चंद्रमा के दर्शन कर जल अर्पित करने और सुख शांति की प्रार्थना करने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है। इस अवसर पर केसर और मेवों से खीर तैयार करके चांदनी में रखने की मान्यता है। बाद में इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। हालांकि खीर को चांदनी में रखने से उसमें औषधीय गुण बढ़ने का धार्मिक विश्वास है लेकिन इसे किसी प्रमाणित चिकित्सा लाभ के रूप में नहीं देखना चाहिए।
शरद पूर्णिमा पर पूजा करते समय सबसे जरूरी बात श्रद्धा और स्वच्छता का ध्यान रखना है। पूजा की सामग्री अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार जुटाई जा सकती है। पहले से तैयारी करने से पूजा के समय किसी जरूरी वस्तु की कमी नहीं होगी और आप पूरे मन से मां लक्ष्मी तथा चंद्रदेव की आराधना कर सकेंगे।
