आधुनिक पेट्रोल पंपों पर इस्तेमाल होने वाले अधिकांश नोजल में यह व्यवस्था मौजूद होती है। इसका मुख्य उद्देश्य फ्यूल टंकी भर जाने पर ईंधन की सप्लाई को अपने आप रोकना है। इस सिस्टम की खास बात यह है कि यह सामान्य तौर पर किसी इलेक्ट्रॉनिक सेंसर या बाहरी बिजली की मदद के बिना काम करता है। इसके बजाय इसमें हवा के दबाव और वैक्यूम के सिद्धांत का इस्तेमाल किया जाता है।
नोजल की नोक के पास होता है छोटा छेद
ऑटो कट-ऑफ सिस्टम को समझने के लिए नोजल की बनावट पर ध्यान देना जरूरी है। इसकी नोक के पास एक छोटा-सा छेद होता है, जो नोजल के भीतर मौजूद एक पतली ट्यूब से जुड़ा रहता है। ईंधन भरने के दौरान यह छेद हवा के प्रवाह में मदद करता है। नोजल के अंदर वेंचुरी प्रभाव के कारण दबाव में अंतर पैदा होता है, जो ऑटोमैटिक शट-ऑफ व्यवस्था को सक्रिय रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जब तक फ्यूल टंकी में पर्याप्त खाली जगह रहती है, तब तक नोजल की नोक के पास मौजूद छेद खुला रहता है। इस स्थिति में हवा का प्रवाह जारी रहता है और ईंधन लगातार टंकी में पहुंचता रहता है। जैसे-जैसे टंकी में पेट्रोल या डीजल का स्तर बढ़ता है, ईंधन नोजल की नोक के करीब आने लगता है। टंकी भरने पर ईंधन इस छोटे छेद को ढक देता है, जिससे हवा का रास्ता बंद हो जाता है।
छेद बंद होते ही नोजल के अंदर दबाव की स्थिति बदल जाती है और वैक्यूम का प्रभाव बढ़ता है। यह बदलाव नोजल के भीतर मौजूद डायफ्राम को सक्रिय करता है। इसके बाद ट्रिगर को पकड़े रखने वाला मैकेनिज्म रिलीज हो जाता है। नतीजतन, नोजल का वाल्व बंद हो जाता है और पेट्रोल या डीजल की सप्लाई तुरंत रुक जाती है। इस तरह बिना किसी कर्मचारी के हस्तक्षेप के नोजल को पता चल जाता है कि टंकी भर चुकी है।
ऑटो कट-ऑफ के बाद दोबारा न दबाएं ट्रिगर
कई वाहन चालक नोजल के पहली बार अपने आप बंद होने के बाद भी उसमें से अतिरिक्त ईंधन भरने की कोशिश करते हैं। इसके लिए वे ट्रिगर को दोबारा दबाते हैं, ताकि टंकी में कुछ और पेट्रोल या डीजल भरा जा सके। हालांकि, ऐसा करने से बचना चाहिए। ऑटो कट-ऑफ सिस्टम का सक्रिय होना इस बात का संकेत है कि ईंधन टंकी भरने के स्तर तक पहुंच चुकी है।
जरूरत से ज्यादा ईंधन भरने की कोशिश करने पर पेट्रोल या डीजल बाहर छलक सकता है। इससे ईंधन की बर्बादी के साथ सुरक्षा संबंधी जोखिम भी पैदा हो सकते हैं। इसलिए नोजल पहली बार अपने आप बंद हो जाए तो ईंधन भरना रोक देना बेहतर है।
पेट्रोल पंप के नोजल में मौजूद यह व्यवस्था ईंधन भरने की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने में मदद करती है। हवा के प्रवाह, दबाव में बदलाव और वैक्यूम के सिद्धांत से काम करने वाला यह मैकेनिज्म टंकी भरने पर सप्लाई रोक देता है। यही वजह है कि पेट्रोल पंप कर्मचारी को हर वाहन की टंकी भरने पर मशीन को हाथ से बंद करने की जरूरत नहीं पड़ती।
