ट्रंप ने फ्रांस में बिगड़े हालात के लिए मैक्रों की आव्रजन नीति को जिम्मेदार ठहराया और यूरोप की इमिग्रेशन नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मैक्रों ने उनकी सलाह पर ध्यान नहीं दिया। हालांकि, फ्रांस में हाल में शुरू हुए प्रदर्शनों की प्रमुख वजह महंगाई, बढ़ते खर्च और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर लोगों की नाराजगी बताई गई है। इन प्रदर्शनों के दौरान कई जगह हिंसा और लूटपाट की घटनाएं भी हुईं।
‘मैक्रों को पहले ही चेताया था’
ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने मैक्रों से काफी पहले कहा था कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोगों को फ्रांस में प्रवेश देने की नीति सही नहीं है। उनका दावा है कि इस नीति के कारण पेरिस का स्वरूप बदल रहा है। ट्रंप ने इसी संदर्भ में फ्रांस को अपनी सीमाओं पर सख्ती बरतने की जरूरत बताई।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब फ्रांस के कई शहरों में सप्ताहांत के दौरान हुए प्रदर्शनों के बाद आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। राजधानी पेरिस के अलावा लिली, नीस और अन्य शहरों में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। कुछ इलाकों में सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगाई गई और रात के समय पाबंदियां लागू की गईं।
पेरिस के कुछ इलाकों में कर्फ्यू, इमरजेंसी पर भी चर्चा
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने कहा कि फिलहाल पूरे पेरिस में कर्फ्यू लगाने के बजाय संवेदनशील इलाकों में पाबंदियां लगाना अधिक उचित है। उन्होंने जरूरत पड़ने पर आपातकाल घोषित करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया।
पेरिस पुलिस ने कुछ क्षेत्रों में प्रदर्शनों पर रोक लगाई। प्लास दे ला रिपब्लिक और ले आल इलाके में रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लगाया गया। प्रशासन का जोर हिंसा को रोकने और सार्वजनिक संपत्तियों तथा कारोबार को नुकसान से बचाने पर है।
फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, हिंसा के बाद करीब 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया और लगभग 1,000 पुलिसकर्मी घायल हुए। वहीं, व्यापार और खुदरा कारोबार से जुड़े संगठनों के अनुसार, हिंसा से करीब 3,000 दुकानें प्रभावित हुईं।
मैक्रों ने हिंसा की निंदा की, आर्थिक चिंताओं को माना जायज
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को टेलीविजन पर देश को संबोधित करते हुए हिंसा और तोड़फोड़ की निंदा की थी। उन्होंने कहा कि किसी भी वजह से ऐसी घटनाओं को सही नहीं ठहराया जा सकता। मैक्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों की मांगों को हिंसा में शामिल लोगों की गतिविधियों से अलग रखने पर जोर दिया।
उन्होंने यह भी माना कि महंगाई, आर्थिक परेशानियों और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर लोगों की चिंताओं को समझना जरूरी है। सरकार के सामने एक ओर प्रदर्शनकारियों की समस्याओं का समाधान तलाशने और दूसरी ओर हिंसा पर नियंत्रण करने की चुनौती है।
स्कूलों की समस्याओं से शुरू हुआ आंदोलन, बाद में बढ़ा दायरा
फ्रांस में प्रदर्शनों की शुरुआत स्कूलों में शिक्षकों की कमी और खराब व्यवस्थाओं को लेकर छात्रों के आंदोलन से हुई थी। बाद में महंगाई, बढ़ते खर्च और सरकारी सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर व्यापक असंतोष भी इसमें शामिल हो गया।
फिलहाल फ्रांस सरकार सुरक्षा व्यवस्था बहाल करने, हिंसा से प्रभावित कारोबारियों की मदद करने और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने की कोशिश कर रही है। इसी बीच ट्रंप ने इन घटनाओं को मैक्रों की आव्रजन नीति से जोड़ते हुए अपनी पुरानी चेतावनी का हवाला दिया है। हालांकि, प्रदर्शन शुरू होने के पीछे बताए गए आर्थिक और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मुद्दे आव्रजन नीति से अलग हैं।
