मुंह में मौजूद छाले खासतौर पर जीभ के पीछे या मुंह के ऐसे हिस्से में हों जहां नसों की संवेदनशीलता अधिक हो तो उनका दर्द आसपास के हिस्सों तक महसूस हो सकता है। इसे referred pain यानी दूसरी जगह महसूस होने वाला दर्द कहा जाता है। ऐसे मामलों में दर्द का वास्तविक स्रोत मुंह में हो सकता है लेकिन व्यक्ति को उसका असर कान के आसपास महसूस होता है। यह स्थिति हर व्यक्ति में एक जैसी नहीं होती और दर्द की तीव्रता भी अलग हो सकती है।
कान में दर्द के पीछे केवल मुंह के छाले ही जिम्मेदार नहीं होते। दांतों में संक्रमण मसूड़ों की परेशानी गले में सूजन टॉन्सिल की समस्या या जबड़े के आसपास होने वाली दिक्कत भी कान तक दर्द पहुंचा सकती है। कई बार कान में संक्रमण होने पर भी दर्द आसपास के चेहरे और जबड़े के हिस्से में महसूस होता है। इसलिए केवल कान में दर्द होने के आधार पर इसका कारण तय करना सही नहीं है।
मुंह के छाले कई वजहों से हो सकते हैं। तनाव नींद की कमी मुंह में चोट बहुत ज्यादा मसालेदार भोजन या पोषण संबंधी कमी कुछ लोगों में छालों की समस्या से जुड़ी हो सकती है। आमतौर पर छोटे छाले कुछ समय में ठीक हो जाते हैं। इस दौरान बहुत ज्यादा तीखा या खट्टा भोजन खाने से बचना राहत दे सकता है। पर्याप्त पानी पीना और मुंह की साफ सफाई बनाए रखना भी जरूरी है।
अगर छाले के साथ कान में हल्का दर्द है और कुछ दिनों में दोनों समस्याएं कम हो रही हैं तो आमतौर पर ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर दर्द लगातार बढ़ रहा है या छाला बार बार हो रहा है तो इसकी वजह समझना जरूरी है। खासतौर पर यदि छाला लंबे समय तक ठीक न हो मुंह में लगातार सूजन या खून आए निगलने में परेशानी हो तेज बुखार हो या कान से संबंधित अन्य लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
बार बार होने वाले मुंह के छालों को भी केवल सामान्य समस्या मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ मामलों में डॉक्टर जांच के बाद पोषण संबंधी कमी संक्रमण या किसी अन्य कारण की पहचान कर सकते हैं। इसी तरह लगातार कान दर्द होने पर ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराना उपयोगी हो सकता है।
कुल मिलाकर मुंह के छाले और कान के दर्द के बीच सीधा संबंध हर मामले में नहीं होता लेकिन शरीर में नसों और आसपास के अंगों के आपसी कनेक्शन के कारण एक जगह की समस्या का दर्द दूसरी जगह महसूस हो सकता है। इसलिए दर्द की सही वजह समझना सबसे जरूरी है। घरेलू उपायों से राहत न मिले या लक्षण लगातार बने रहें तो विशेषज्ञ की सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
