रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा की पुष्टि क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को की। उन्होंने कहा कि पुतिन कुछ ही दिनों में भारत की यात्रा शुरू करेंगे। पेसकोव के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच लंबे समय से करीबी और व्यावहारिक संबंध रहे हैं। दोनों नेता द्विपक्षीय एजेंडे से जुड़े संवेदनशील विषयों पर भी खुले और रचनात्मक तरीके से बातचीत करने में सक्षम हैं।
रूस की ओर से पुतिन की इस यात्रा को भारत के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, रक्षा, तकनीक और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में लंबे समय से सहयोग रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर विचार किया जा सकता है।
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और उसने समूह के लिए लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर आधारित व्यापक प्राथमिकताएं तय की हैं। सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा।
ब्रिक्स सहयोग को रूस मुख्य रूप से तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित मानता है। इनमें राजनीति और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वित्त तथा सांस्कृतिक और मानवीय सहयोग शामिल हैं। रूस समूह के विस्तार और अलग-अलग प्रारूपों में नए देशों की भागीदारी को भी समर्थन देता रहा है। ऐसे में सम्मेलन में ब्रिक्स के भविष्य और वैश्विक स्तर पर इसकी भूमिका से जुड़े मुद्दे भी अहम रह सकते हैं।
पुतिन और मोदी की इससे पहले 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में मुलाकात हुई थी। दोनों नेता शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन से इतर मिले थे। उस बातचीत के दौरान रूस और भारत के संबंधों को लगातार मजबूत बताते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।
बिश्केक बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत का रुख भी स्पष्ट किया था। उन्होंने शत्रुता समाप्त करने और शांति की दिशा में प्रयासों को समर्थन देने की बात कही थी। भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए।
इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि 2026 में संगठन की स्थापना के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। भारत की अध्यक्षता के दौरान व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, शहरी विकास, स्टार्टअप और जलवायु कार्रवाई जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुतिन की मौजूदगी से सम्मेलन में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ ब्रिक्स के व्यापक एजेंडे को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
