मौजूदा वेतन व्यवस्था को देखें तो 6वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 था जबकि 7वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर 2.57 किया गया था। इसी बदलाव के बाद न्यूनतम मूल वेतन 7 हजार रुपए से बढ़कर 18 हजार रुपए हो गया था। अब 8वें वेतन आयोग के सामने इससे कहीं ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी गई है। कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को ध्यान में रखते हुए नए वेतन ढांचे में कर्मचारियों को पर्याप्त राहत दी जाए।
सर्वे ऑफ इंडिया की मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन ने 3.61 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव रखा है। यदि इस प्रस्ताव को स्वीकार किया जाता है तो 18 हजार रुपए की मौजूदा न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर लगभग 64 हजार 980 रुपए यानी करीब 65 हजार रुपए हो सकती है। इसका मतलब है कि मौजूदा न्यूनतम बेसिक वेतन की तुलना में कर्मचारियों को काफी बड़ा उछाल मिल सकता है। हालांकि यह केवल प्रस्ताव के आधार पर निकाला गया अनुमान है और इसे अंतिम वेतन नहीं माना जा सकता।
वहीं नेशनल काउंसिल जेसीएम स्टाफ साइड और भारत पेंशनर्स समाज की ओर से 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग की गई है। इस हिसाब से 18 हजार रुपए की बेसिक सैलरी लगभग 69 हजार रुपए तक पहुंच सकती है। अगर यह प्रस्ताव स्वीकार होता है तो कर्मचारियों के साथ पेंशनभोगियों को भी बड़ा फायदा मिलने की संभावना बन सकती है क्योंकि पेंशन और कई सेवानिवृत्ति लाभ मूल वेतन से जुड़े होते हैं।
सबसे ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ की ओर से की गई है। संगठन ने 4 फिटमेंट फैक्टर का सुझाव दिया है। यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो 18 हजार रुपए का न्यूनतम मूल वेतन बढ़कर करीब 72 हजार रुपए हो सकता है। यानी 3.61 और 4 के फिटमेंट फैक्टर वाले प्रस्तावों के बीच न्यूनतम बेसिक सैलरी में लगभग 7 हजार 20 रुपए का अंतर बन सकता है।
हालांकि कर्मचारियों को यह समझना जरूरी है कि 65 हजार 69 हजार और 72 हजार रुपए के आंकड़े अभी केवल अलग अलग संगठनों की मांगों के आधार पर लगाए गए अनुमान हैं। 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिश आने से पहले यह तय नहीं माना जा सकता कि कर्मचारियों का वास्तविक न्यूनतम वेतन कितना होगा। अंतिम वेतन वृद्धि केवल फिटमेंट फैक्टर से तय नहीं होगी बल्कि नए वेतन मैट्रिक्स महंगाई भत्ते अन्य भत्तों और आयोग की व्यापक सिफारिशों का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान होगा।
फिलहाल 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों की मांगों और सुझावों पर विचार का दौर जारी है। आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति सेवानिवृत्त रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं और उसे अपनी सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अभी अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करना होगा। आयोग की सिफारिशें सामने आने और सरकार की मंजूरी के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में वास्तव में कितना इजाफा होता है।
