इस अशुभ ग्रहीय दशा के कारण वृषभ राशि के जातकों के लिए आगामी एक महीने का समय काफी उतार-चढ़ाव से भरा रहने वाला है। विशेष रूप से नौकरीपेशा लोगों को अपने कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों और उच्च अधिकारियों के साथ बातचीत करते समय अपनी वाणी पर कड़ा संयम रखना होगा। वैचारिक मतभेद बढ़ने से बने-बनाए काम बिगड़ने की आशंका है। इसके अतिरिक्त, इस अवधि में किसी भी प्रकार के बड़े वित्तीय लेन-देन या नए निवेश से पूरी तरह बचना ही समझदारी होगी।
मिथुन राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर उनके द्वितीय भाव में हो रहा है, जहां राहु से षडाष्टक संबंध बनने के कारण सबसे ज्यादा असर उनके स्वास्थ्य पर देखने को मिल सकता है। इस दौरान मुख्य रूप से आंखों और पेट से संबंधित पुरानी बीमारियां दोबारा उभर सकती हैं। आर्थिक मोर्चे पर भी अचानक किसी अप्रत्याशित और बड़े खर्च के सामने आने से घरेलू बजट पूरी तरह से डगमगा सकता है। इस राशि के लोगों को अपने गुप्त शत्रुओं और विरोधियों की गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखनी होगी।
तुला राशि के जातकों के लिए यह गोचर उनके कार्यस्थल पर अत्यधिक काम का दबाव और मानसिक तनाव लेकर आ रहा है। पेशेवर मोर्चे पर ऐसी स्थितियां बन सकती हैं जहां आपकी कड़ी मेहनत का श्रेय किसी अन्य सहकर्मी को मिल जाए। ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि इस एक महीने के दौरान किसी भी प्रकार का जोखिम न लें और वर्तमान नौकरी बदलने का विचार पूरी तरह त्याग दें। पारिवारिक जीवन में भी जीवनसाथी के साथ वैचारिक तालमेल की कमी के कारण छोटी-छोटी बातों पर गृह क्लेश की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
कुंभ राशि के जातकों पर इस योग का सबसे गहरा और सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना है, क्योंकि राहु वर्तमान में इसी राशि में विराजमान हैं। सूर्य और राहु के आमने-सामने आने से जातक के भीतर एक अनजाना डर, मानसिक भ्रम और अनिर्णय की स्थिति बनी रहेगी। इस अवधि में किसी भी प्रकार की अनावश्यक या लंबी दूरी की यात्राओं से बचना अनिवार्य है। सड़कों पर वाहन चलाते समय शत-प्रतिशत सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि इस दौरान चोट अथवा वाहन दुर्घटना के ज्योतिषीय योग प्रबल दिखाई दे रहे हैं। इन नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए जातकों को नियमित रूप से भगवान शिव का जलाभिषेक करने और सूर्य देव को कुमकुम मिश्रित जल से अर्घ्य देने की सलाह दी गई है।
