धनतेरस पर मालव्य राजयोग का संयोग
ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को सुख वैभव सौंदर्य और भौतिक सुख सुविधाओं का कारक ग्रह माना जाता है। जब शुक्र अपनी स्वराशि तुला में स्थित होते हैं तो मालव्य राजयोग बनने की मान्यता है। इसे पंच महापुरुष योगों में शामिल किया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह योग सुख सुविधाओं और समृद्धि से जुड़ा होता है। यही वजह है कि इस बार धनतेरस पर इस संयोग को खास माना जा रहा है। हालांकि ग्रहों के योग को धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए।
खरीदारी के लिए सुबह से रात तक तीन शुभ मुहूर्त
धनतेरस के दिन सोना चांदी आभूषण बर्तन और घर के लिए नई वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख और समृद्धि का प्रतीक बनती हैं। इस बार खरीदारी के लिए तीन प्रमुख समय बताए गए हैं।
पहला शुभ मुहूर्त सुबह 8 बजकर 16 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसे चौघड़िया मुहूर्त बताया गया है। इस दौरान सोना चांदी बर्तन और घर की जरूरत का सामान खरीदा जा सकता है।
दूसरा शुभ समय अभिजीत मुहूर्त का रहेगा। यह सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक बताया गया है। इस अवधि में भी आभूषण बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी की जा सकती है।
तीसरा शुभ समय शाम को प्रदोष काल में रहेगा। यह शाम 5 बजकर 49 मिनट से रात 8 बजकर 23 मिनट तक बताया गया है। इस दौरान खरीदारी के साथ भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा भी की जा सकती है।
शाम के समय दीपदान का भी विशेष महत्व माना जाता है। घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर सुख समृद्धि की कामना की जाती है। धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा स्वास्थ्य और आरोग्य के लिए की जाती है जबकि माता लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना धन तथा संपन्नता की कामना से होती है।
धनतेरस पर खरीदारी करते समय अपनी जरूरत और बजट का ध्यान रखना भी जरूरी है। सोना चांदी या अन्य महंगी वस्तुएं खरीदने से पहले उनकी शुद्धता और कीमत की जांच कर लें। ध्यान रहे कि शुभ मुहूर्त शहर और पंचांग की गणना के अनुसार अलग हो सकते हैं इसलिए स्थानीय पूजा समय की पुष्टि जरूर करें।
