हेलिकॉप्टर बदरीनाथ धाम से देहरादून के लिए रवाना हुआ था। इसमें सवार यात्रियों की पहचान प्रताप, अरुण सालुंके, शंकर गौड़ा, के. सुधीर और एच.एस. नटराज के रूप में हुई है। वहीं, हादसे में जान गंवाने वाले पायलट दिल्ली के रहने वाले थे।
शंकर गौड़ा को याद कर भावुक हुए पड़ोसी
हादसे में जान गंवाने वाले शंकर गौड़ा पेशे से वकील थे। उनके पड़ोसियों के मुताबिक, वह बेहद मिलनसार और मददगार स्वभाव के व्यक्ति थे। काम के सिलसिले में उनका बेंगलुरु आना-जाना लगा रहता था। मोहल्ले में किसी को भी परेशानी होती या मदद की जरूरत पड़ती, तो शंकर गौड़ा हमेशा आगे रहते थे।
पड़ोसियों ने बताया कि उन्हें ईश्वर में गहरी आस्था थी। नवरात्रि के व्रत से लेकर गणपति पूजा और दिवाली तक, वह हर त्योहार पूरे उत्साह से मनाते थे। उनके निधन से परिवार के साथ-साथ पूरा मोहल्ला गमगीन है।
2007 बैच के पुलिस इंस्पेक्टर थे अरुण सालुंके
हादसे में जान गंवाने वाले अरुण सालुंके कर्नाटक के बेलगावी जिले के अथानी तालुका स्थित अराताला गांव के निवासी थे। वह कर्नाटक पुलिस के 2007 बैच के इंस्पेक्टर थे और बेंगलुरु की सेंट्रल क्राइम ब्रांच में तैनात थे।
अरुण ने अपने करियर की शुरुआत दिल्ली में इंटेलिजेंस इंस्पेक्टर के रूप में की थी। पुलिस विभाग में अपनी सेवाओं के दौरान उन्होंने पहचान बनाई थी। जोशीमठ के पास हुआ हेलिकॉप्टर हादसा उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित हुआ।
दर्शन के बाद माना गांव भी पहुंचे थे श्रद्धालु
जानकारी के मुताबिक, कर्नाटक से आए श्रद्धालु गुरुवार सुबह करीब 10 बजे बदरीनाथ धाम पहुंचे थे। दर्शन करने के बाद वे भारत के अंतिम गांव के रूप में चर्चित माना गांव भी गए। वहां से लौटने के बाद उन्होंने हेलीपैड पर मौजूद गाइड से पूछा था कि क्या वे उसी दिन वापस लौट सकते हैं।
हालांकि, मौसम अनुकूल नहीं होने के कारण उसी दिन उड़ान संभव नहीं हो सकी। तय कार्यक्रम के मुताबिक, यात्रियों को शुक्रवार सुबह लौटना था। लेकिन खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण हेलिकॉप्टर की उड़ान में देरी हुई। आखिरकार दोपहर 1 बजकर 12 मिनट पर हेलिकॉप्टर ने बदरीनाथ धाम से उड़ान भरी।
उड़ान के 15 मिनट बाद टूटा संपर्क
उड़ान भरने के करीब 15 मिनट बाद हेलिकॉप्टर का एयर ट्रैफिक कंट्रोल और बेस से संपर्क टूट गया। इसके बाद दुर्घटना की सूचना सामने आई। हादसे में पायलट और पांचों यात्रियों की जान चली गई।
कर्नाटक सरकार ने सहायता का दिया भरोसा
हादसे के बाद कर्नाटक सरकार ने कहा है कि वह उत्तराखंड प्रशासन के लगातार संपर्क में है। दोनों राज्यों के बीच समन्वय कर मृतकों के पार्थिव शरीर जल्द कर्नाटक लाने की व्यवस्था की जा रही है। राज्य सरकार ने शोकाकुल परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन भी दिया है।
