इस सुरक्षा खामी का पता साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर मार्क ब्लास्जिक ने लगाया है। रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए एक खास तरह के SMS का इस्तेमाल किया जाता है। यह सामान्य टेक्स्ट मैसेज की तरह नहीं होता बल्कि फोन के सिस्टम को प्रभावित करने के लिए तैयार किया गया होता है। जैसे ही ऐसा मैसेज डिवाइस तक पहुंचता है एंड्रॉयड सिस्टम उसे प्रोसेस करने की कोशिश करता है। इसी प्रक्रिया के दौरान फोन का कॉल मैनेज करने वाला सिस्टम क्रैश हो सकता है। इसके चलते मोबाइल पर चल रही कॉल डिस्कनेक्ट हो सकती हैं और यूजर को नेटवर्क तथा कॉलिंग से जुड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इस खामी की सबसे चिंताजनक बात यह है कि यूजर को मैसेज खोलने या किसी लिंक पर क्लिक करने की जरूरत नहीं होती। कई बार फोन के इनबॉक्स में इसका कोई साफ निशान या नोटिफिकेशन भी दिखाई नहीं देता। यानी यूजर को पता भी नहीं चलता कि उसके फोन में किस वजह से परेशानी शुरू हुई है। रिसर्चर के मुताबिक करीब 20 ऐसे खतरनाक मैसेज किसी एंड्रॉयड स्मार्टफोन को लगातार क्रैश होने की स्थिति में पहुंचा सकते हैं।
इसका असर बूटलूप के रूप में भी सामने आ सकता है। बूटलूप ऐसी स्थिति होती है जिसमें फोन बार बार चालू होने की कोशिश करता है लेकिन सामान्य तरीके से स्टार्ट नहीं हो पाता। इसकी वजह यह हो सकती है कि सिस्टम दोबारा उसी मैसेज को प्रोसेस करने लगता है और फिर क्रैश हो जाता है। इस तरह फोन चालू होने और बंद होने के चक्र में फंस सकता है। ऐसी स्थिति में यूजर के लिए मोबाइल का इस्तेमाल करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस समस्या का समाधान सामान्य फैक्ट्री रिसेट से भी मुश्किल हो सकता है। इसकी वजह यह है कि टेलीकॉम ऑपरेटर के सिस्टम में मैसेज दोबारा डिलीवर करने की कोशिश जारी रह सकती है। फोन जैसे ही दोबारा चालू होगा मैसेज फिर से पहुंचकर सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। रिसर्चर के मुताबिक कंप्यूटर से फोन कनेक्ट करके ऐसे मैसेज की पहचान और उन्हें हटाने का तरीका अपनाया जा सकता है। हालांकि इसके लिए तकनीकी जानकारी की जरूरत पड़ सकती है।
रिसर्चर ने बताया कि उन्होंने 5 मई 2026 को इस खामी की जानकारी गूगल को दी थी। रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती दौर में इस मामले को लेकर सुरक्षा से जुड़ी गंभीरता पर सहमति नहीं बनी लेकिन बाद में गूगल इस समस्या को ठीक करने की दिशा में काम कर रहा था। ऐसे में एंड्रॉयड यूजर्स के लिए जरूरी है कि वे अपने स्मार्टफोन में उपलब्ध सिस्टम और सिक्योरिटी अपडेट की जांच करते रहें। फोन निर्माता कंपनी की ओर से जारी अपडेट को समय पर इंस्टॉल करना चाहिए। पुराने फोन जिन्हें अब सुरक्षा अपडेट नहीं मिलते उनके यूजर्स को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। SMS ऑफ डेथ का मामला बताता है कि साइबर हमले के लिए हमेशा किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करना जरूरी नहीं होता। कई बार बिना किसी चेतावनी के पहुंचने वाला मैसेज भी स्मार्टफोन के लिए गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है।
