राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए लोगों से इस रैली और मार्च में शामिल होने की अपील की। विपक्षी दलों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों के खिलाफ आवाज उठाना है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर उठा रहे हैं।
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और इस प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने दावा किया कि सवाल उठाने वालों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया है। राहुल गांधी ने कहा कि अब देश इस मुद्दे पर चुप नहीं रहेगा। उन्होंने मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए लोगों से एकजुट होने का आह्वान किया।
उन्होंने छात्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों सहित लोकतंत्र को लेकर चिंतित नागरिकों से रैली में पहुंचने की अपील की। राहुल गांधी के मुताबिक, वोट नागरिकों का अधिकार है और इसकी सुरक्षा के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। विपक्ष इस अभियान के जरिए मतदाता सूची की प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता का सवाल उठा रहा है।
रैली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच इसकी तारीख पर भी विवाद सामने आया है। कार्यक्रम 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होना प्रस्तावित है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस से इस तारीख पर पुनर्विचार करने की मांग की है। बीजेपी का कहना है कि 1 नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी है और इस दिन राजनीतिक रैली आयोजित करने से सिख समुदाय की भावनाएं आहत हो सकती हैं।
बीजेपी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस पर इस तारीख के चयन को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने सिख समुदाय और व्यापारियों की भावनाओं का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा। इस तरह रैली का मुद्दा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के साथ-साथ तारीख को लेकर राजनीतिक विवाद का विषय भी बन गया है।
राहुल गांधी ने बीजेपी की आपत्ति के बीच अपने बयान में सत्तारूढ़ दल और उसके सहयोगियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि वे रैली का प्रचार जोर-शोर से कर रहे हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि बीजेपी अगले सात दिनों तक भी इसी तरह प्रचार करती रहे, ताकि कार्यक्रम की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।
‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली के जरिए विपक्ष मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर, बीजेपी ने आयोजन की तारीख को लेकर आपत्ति जताई है। ऐसे में 1 नवंबर को होने वाला यह कार्यक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन गया है। रैली में भागीदारी और दोनों पक्षों की आगे की प्रतिक्रियाओं पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।
