रंजन सोढ़ी का जन्म 23 अक्टूबर 1979 को पंजाब के फिरोजपुर में हुआ था। बचपन से ही निशानेबाजी के प्रति उनका झुकाव आगे चलकर एक सफल खेल करियर में बदल गया। उन्होंने मेहनत और निरंतर अभ्यास के जरिए डबल ट्रैप शूटिंग में अपनी अलग पहचान बनाई। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया और वह भारतीय निशानेबाजी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।
साल 2010 रंजन सोढ़ी के करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा। दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने दो सिल्वर मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसी वर्ष चीन के ग्वांगझू में आयोजित एशियन गेम्स में उन्होंने डबल ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके अलावा डबल ट्रैप टीम स्पर्धा में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल भी जीता। इन उपलब्धियों ने उन्हें देश के प्रमुख निशानेबाजों की कतार में खड़ा कर दिया।
विश्व स्तर पर भी सोढ़ी का प्रदर्शन शानदार रहा। साल 2010 में इटली के लोनाटो में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में उन्होंने डबल ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद 2011 में चीन की राजधानी बीजिंग में हुए वर्ल्ड कप में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उसी वर्ष स्लोवेनिया के मेरिबोर में आयोजित प्रतियोगिता में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। लगातार अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतना उनकी निरंतरता और कौशल को दर्शाता है।
चार अक्टूबर 2011 को संयुक्त अरब अमीरात के अल ऐन में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में सोढ़ी ने फिर गोल्ड मेडल जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। साल 2011 में वह वर्ल्ड कप खिताब का सफलतापूर्वक बचाव करने वाले पहले भारतीय निशानेबाज बने। यह उपलब्धि भारतीय शूटिंग के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी प्रतिष्ठा और मजबूत हुई।
विश्व कप में शानदार प्रदर्शन के दम पर रंजन सोढ़ी ने 2012 के लंदन ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई किया। उन्होंने डबल ट्रैप स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि वह पदक जीतने में सफल नहीं रहे। क्वालिफिकेशन राउंड में 134 अंक हासिल कर वह 11वें स्थान पर रहे। प्रतियोगिता की शुरुआत में उन्होंने 48 अंक बनाकर अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन आगे वह अपनी लय बरकरार नहीं रख सके। ओलंपिक पदक भले ही उनके खाते में नहीं आया लेकिन वहां तक पहुंचना भी उनके करियर की बड़ी उपलब्धि रही।
निशानेबाजी में उनके योगदान और उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया। रंजन सोढ़ी की कहानी मेहनत अनुशासन और लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने साबित किया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय खिलाड़ी भी अपनी प्रतिभा के दम पर बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
