प्रदर्शनकारियों के मुताबिक उनका धरना 25वें दिन भी जारी रहा। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से प्रदेश के गांवों और ग्राम सभाओं में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में योगदान दे रहे हैं लेकिन वेतन और सेवा से जुड़ी समस्याओं का समाधान अब तक नहीं हुआ है। सीएचओ संघ के प्रदेश सदस्य सनत सिंह ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में अलग कैडर का निर्माण हरियाणा की तर्ज पर 4800 ग्रेड पे और सातवें वेतनमान का लाभ शामिल है। इसके अलावा पीवीआई को मूल मानदेय में शामिल करने की मांग भी उठाई जा रही है। उनका कहना है कि शासन और विभागीय अधिकारियों के साथ कई बार बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
सीएचओ की अन्य मांगों में नियमितीकरण स्थानांतरण नीति लागू करना और कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना भी शामिल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे निर्धारित नियमों के अनुसार अपने अधिकार और सुविधाएं चाहते हैं। उनका आरोप है कि लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में काम करने के बावजूद उन्हें सेवा संबंधी लाभ और वेतनमान को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक महिला सीएचओ ने बताया कि वे 1956 की नियमावली के अनुसार व्यवस्था लागू करने कैडर निर्माण और वेतन विसंगति दूर करने की मांग कर रही हैं। उनके अनुसार दूसरे कैडरों के कर्मचारियों की तुलना में उन्हें लगभग पांच हजार रुपये कम वेतन मिलता है। उन्होंने पीवीआई को मूल मानदेय में शामिल करने की मांग भी दोहराई।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वे अपनी समस्याओं को लेकर करीब दस बार मंत्रियों के आवास पर जाकर अपनी बात रख चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिला है। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संगठन की प्रदेश उपाध्यक्ष रश्मि शर्मा ने कहा कि मांगों को लेकर संगठन पीछे हटने वाला नहीं है। जरूरत पड़ने पर एक से दो महीने तक भी धरना जारी रखा जाएगा। उनका कहना है कि वेतन और सेवा से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान जरूरी है ताकि स्वास्थ्य अधिकारी बिना परेशानी के अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें।
धरने में शामिल बदायूं के प्रतीक कुमार और फिरोजाबाद के अमित नायक ने भी मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लगातार प्रदर्शन के बावजूद समाधान नहीं निकलने के कारण उन्हें अनिश्चितकालीन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। सीएचओ प्रतिनिधियों के अनुसार प्रदेश में करीब 17 हजार सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी गांवों और ग्राम सभाओं में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कामकाज पर असर पड़ने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
फिलहाल प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमितीकरण कैडर निर्माण और वेतन विसंगति जैसे मुद्दों पर समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। सामूहिक इस्तीफे और विधानसभा घेराव की चेतावनी के बीच अब निगाहें सरकार और स्वास्थ्य विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं।
