ट्रंप ने एक साक्षात्कार के दौरान परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े सवाल पर कहा कि उन्हें इसकी जरूरत नहीं है और वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उनसे यह भी पूछा गया कि क्या अमेरिका ईरान की जमीन पर अपने सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा होता नहीं दिख रहा। उनके इस बयान से फिलहाल परमाणु हथियारों के इस्तेमाल और जमीनी सैनिकों की तैनाती को लेकर अमेरिकी प्रशासन की घोषित स्थिति सामने आई है।
ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर पारंपरिक हथियारों के इस्तेमाल पर भी चर्चा हो रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य योजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया है कि ट्रंप ने ईरान पर नए हमलों के विकल्प तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इन विकल्पों में ईरान के ऊर्जा ढांचे और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की योजनाएं शामिल हैं। इनमें अमेरिका के शक्तिशाली गैर-परमाणु बम एमओएबी का इस्तेमाल भी एक संभावित विकल्प बताया गया है।
एमओएबी को आम तौर पर ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ कहा जाता है। यह एक शक्तिशाली पारंपरिक बम है, परमाणु हथियार नहीं। ट्रंप ने भी बातचीत के दौरान इसी अंतर को स्पष्ट किया। परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से इनकार करने के बावजूद, ईरान के खिलाफ पारंपरिक हथियारों से संभावित हमलों के विकल्पों पर विचार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
ईरान के पिकैक्स माउंटेन क्षेत्र में स्थित ठिकाने को निशाना बनाने का विचार भी चर्चा में है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना चाहता। उन्होंने दावा किया कि पहले किए गए अमेरिकी हमलों में ईरान के परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार, ईरान की कुछ परमाणु सुविधाएं पहाड़ों के नीचे स्थित हैं। इसी संदर्भ में पिकैक्स माउंटेन पर हमले की संभावना पर विचार किए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि इन संभावित सैन्य विकल्पों में से किसी को अंतिम मंजूरी दी गई है या नहीं। फिलहाल नए हमलों की योजनाएं तैयार करने और विभिन्न विकल्पों पर विचार किए जाने की बात सामने आई है। इसलिए संभावित कार्रवाई और वास्तविक रूप से किए गए हमलों के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।
ट्रंप ने बातचीत के दौरान अमेरिका, रूस और चीन के परमाणु हथियार भंडार का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु हथियार भंडार है, जबकि रूस दूसरे और चीन तीसरे स्थान पर है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन अगले पांच वर्षों में अमेरिका के करीब पहुंच सकता है। यह उनका आकलन है, न कि भविष्य की स्थिति का स्वतंत्र रूप से प्रमाणित निष्कर्ष।
अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, अमेरिका रूस और चीन के साथ परमाणु हथियारों में कमी लाने को लेकर बातचीत कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन चर्चाओं के जरिए परमाणु हथियारों को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। इस तरह ट्रंप के बयान में एक ओर ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों और जमीनी सैनिकों के इस्तेमाल से इनकार किया गया है, वहीं दूसरी ओर संभावित पारंपरिक सैन्य कार्रवाई और वैश्विक परमाणु हथियारों में कमी को लेकर बातचीत का उल्लेख भी किया गया है।
