संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी रजत जैन
-70 लाख डॉलर की फंडिंग के बाद सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज का अगला लक्ष्य वैश्विक बाजार, अनुसंधान और हृदय जांच की पहुंच बढ़ाना
देहरादून। एक दोस्त को खोने का दर्द, कॉलेज के दिनों में उठे कुछ सवाल और तकनीक के जरिये लोगों की जिंदगी बचाने की कोशिश। वर्ष 2016 में उत्तराखंड से शुरू हुई यह छोटी-सी पहल आज 70 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 67 करोड़ रुपये) के निवेश तक पहुंच गई है। यह कहानी देहरादून स्थित मेडटेक कंपनी सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज की है, जिसने पोर्टेबल ईसीजी प्लेटफॉर्म ‘स्पंदन’ के जरिये हृदय संबंधी जांच को आसान और सुलभ बनाने की दिशा में काम किया है।
सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज ने हाल में सीरीज-ए फंडिंग दौर में 70 लाख डॉलर जुटाए हैं। निवेश दौर का नेतृत्व निवेशक आशीष कचोलिया, लशित सांघवी, अल्केमी कैपिटल और 3one4 कैपिटल ने किया। कंपनी के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा निवेश दौर है। खास बात यह है कि देहरादून से शुरू हुई कंपनी में देश के प्रमुख निवेशकों का भरोसा ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक आधारित समाधानों की मांग लगातार बढ़ रही है।
इस निवेश की कहानी सिर्फ पूंजी जुटाने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक ऐसा उद्देश्य है, जिसकी शुरुआत एक व्यक्तिगत अनुभव से हुई थी।
कॉलेज के दिनों में संस्थापकों के एक मित्र की हृदय संबंधी समस्या से मृत्यु हो गई। इस घटना ने रजत जैन, अर्पित जैन, सबित रावत, नितिन चंदोला और सौरभ बडोला को सोचने पर मजबूर किया कि यदि हृदय संबंधी समस्या का समय पर पता चल जाए और इलाज शुरू करने में लगने वाला समय कम किया जा सके तो क्या किसी की जान बचाई जा सकती है।
इसी सवाल ने तकनीक के माध्यम से समाधान खोजने की दिशा में उन्हें आगे बढ़ाया। वर्ष 2016 में उत्तराखंड में एक अनुसंधान एवं विकास पहल के रूप में शुरू हुआ प्रयास धीरे-धीरे सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज में बदल गया।
कंपनी ने हृदय की जांच के लिए पोर्टेबल ईसीजी तकनीक विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया। इसी प्रयास का परिणाम ‘स्पंदन’ के रूप में सामने आया, जिसे हृदय संबंधी जांच को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में विकसित किया गया।
सनफॉक्स की कहानी इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि इसकी जड़ें किसी बड़े महानगर के स्टार्टअप हब में नहीं, बल्कि देहरादून में हैं। कंपनी ने यहीं से अनुसंधान और उत्पाद विकास की यात्रा शुरू की और अब उसी तकनीक को देश से बाहर ले जाने की तैयारी कर रही है।
कंपनी के लिए जुटाई गई नई पूंजी इस विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसका इस्तेमाल भारत में पहुंच बढ़ाने, वैश्विक बाजारों में प्रवेश करने, कारोबार बढ़ाने की क्षमता विकसित करने और संगठन का विस्तार करने के साथ अनुसंधान एवं विकास पर किया जाएगा।
सीरीज-ए दौर में आशीष कचोलिया, लशित सांघवी, अल्केमी कैपिटल और 3one4 कैपिटल जैसे निवेशकों की भागीदारी ने कंपनी को विस्तार के लिए नई वित्तीय ताकत दी है।
सनफॉक्स के लिए यह निवेश केवल कारोबार बढ़ाने का अवसर नहीं है, बल्कि देहरादून में विकसित तकनीक को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक ले जाने का माध्यम भी है। कंपनी अब अपने उत्पाद और तकनीकी क्षमताओं को बड़े पैमाने पर विकसित करने की तैयारी में है।
संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी रजत जैन के अनुसार, इस निवेश से कंपनी को देहरादून में विकसित अपने काम को बड़े स्तर तक ले जाने के लिए आवश्यक संसाधन मिलेंगे। कंपनी अनुसंधान एवं विकास में व्यापक निवेश करने के साथ भारत में अपनी पहुंच बढ़ाएगी और सनफॉक्स तथा ‘स्पंदन’ को वैश्विक बाजारों तक ले जाने के लिए जरूरी क्षमताएं विकसित करेगी।
व्यक्तिगत पीड़ा से सामाजिक उद्देश्य तक
सनफॉक्स की यात्रा यह बताती है कि कई बार किसी बड़ी पहल की शुरुआत किसी बड़ी प्रयोगशाला या बड़े निवेश से नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत अनुभव से होती है। एक दोस्त की असमय मृत्यु से उपजा सवाल धीरे-धीरे अनुसंधान में बदला, अनुसंधान ने तकनीक का रूप लिया और तकनीक ने एक कंपनी का।
आज जब कंपनी ने 70 लाख डॉलर का निवेश जुटाया है, उसके सामने अगला लक्ष्य केवल बाजार विस्तार नहीं, बल्कि उस तकनीक की पहुंच बढ़ाना भी है जिसके पीछे शुरुआत से ही हृदय संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार में देरी कम करने की सोच रही है।
देहरादून से शुरू हुई यह यात्रा अब वैश्विक बाजार की ओर बढ़ रही है। ‘स्पंदन’ की कहानी इस बात का उदाहरण भी है कि छोटे शहरों में शुरू होने वाले नवाचार, यदि उन्हें सही तकनीक, निरंतर अनुसंधान और निवेश का साथ मिले, तो बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
