TVK सरकार में मंत्री आधव अर्जुन, राज मोहन और आर. निर्मल कुमार ने CPI(M), CPI और MDMK को बैठक में शामिल होने का न्योता दिया है। हालांकि गठबंधन की सबसे बड़ी सहयोगी कांग्रेस को बैठक में बुलाया गया है या नहीं, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। बैठक का एजेंडा भी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है।
PM पद को लेकर क्यों गरमाया मामला?
बैठक ऐसे समय हो रही है जब TVK के कुछ विधायक खुले तौर पर विजय को 2029 के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की मांग कर रहे हैं। विधायक कनिमोझी ने दावा किया कि 2029 में विजय TVK की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, इसका फैसला दिल्ली नहीं बल्कि तमिलनाडु करेगा।
कनिमोझी ने विजय को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव लाने वाला नेता बताते हुए एक और बड़ा दावा किया। उनके मुताबिक राहुल गांधी अंततः विजय की उम्मीदवारी का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के समर्थन से ही विजय मुख्यमंत्री बने हैं और आगे राहुल ही उनका हाथ पकड़कर उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाएंगे।
रानीपेट की विधायक आई. ताहिरा, ऊर्जा संसाधन एवं कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार समेत TVK के कई अन्य नेताओं ने भी विजय की राष्ट्रीय भूमिका की पैरवी की है।
कांग्रेस ने साफ किया- राहुल गांधी ही पसंद
TVK नेताओं के बयानों पर कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि 2029 के प्रधानमंत्री पद को लेकर उसकी पसंद राहुल गांधी हैं। कांग्रेस विधायक दल की नेता थरहाई कथबर्ट ने विजय को PM उम्मीदवार बनाने के अभियान को TVK के कुछ पहली बार चुने गए विधायकों का ‘फैन माइंडसेट’ करार दिया।
कांग्रेस का कहना है कि विजय पहले ही राहुल गांधी को गठबंधन का उम्मीदवार स्वीकार कर चुके हैं। ऐसे में कुछ विधायकों के व्यक्तिगत बयान पार्टी की तय रणनीति नहीं माने जा सकते।
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने भी विजय की PM दावेदारी से जुड़े बयानों को मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का चुनाव आखिरकार देश के मतदाता ही करेंगे।
कांग्रेस का साथ जरूरी, अपने दम पर बहुमत नहीं
विजय की सरकार की मजबूरी यह है कि TVK के पास अकेले बहुमत नहीं है। सरकार कांग्रेस, वामपंथी दलों, VCK और IUML के समर्थन पर टिकी है। TVK की सबसे बड़ी सहयोगी कांग्रेस के राज्य सरकार में पांच विधायक और दो मंत्री हैं।
ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर विजय और राहुल गांधी को लेकर टकराव लंबा खिंचता है तो इसका असर राज्य सरकार की स्थिरता पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि 9 सितंबर की बैठक को गठबंधन के भीतर पैदा हुई तल्खी कम करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
INDIA ब्लॉक में नहीं, फिर भी कांग्रेस सरकार में
TVK अभी औपचारिक रूप से INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं बनी है। इसके बावजूद तमिलनाडु में कांग्रेस उसकी सरकार का हिस्सा है। इससे दोनों दलों को राज्य में साथ काम करते हुए राष्ट्रीय राजनीति में अलग-अलग रुख अपनाने की गुंजाइश मिलती है।
हालांकि विजय को PM बनाने की मांग और कांग्रेस की राहुल गांधी को लेकर स्पष्ट पसंद ने गठबंधन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब बड़ा सवाल यही है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले क्या राज्य में विजय-कांग्रेस की साझेदारी राष्ट्रीय नेतृत्व की महत्वाकांक्षाओं के टकराव के बावजूद कायम रह पाएगी?
