दरअसल Bluetooth और Wi-Fi दोनों वायरलेस तकनीक हैं और कुछ स्थितियों में दोनों एक ही 2.4 GHz फ्रीक्वेंसी बैंड का इस्तेमाल कर सकते हैं। यही वजह है कि लोगों को लगता है कि Bluetooth और Wi-Fi एक दूसरे की स्पीड को सीधे प्रभावित करते हैं। जब आसपास वायरलेस डिवाइस की संख्या ज्यादा होती है तब रेडियो इंटरफेरेंस की संभावना बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में नेटवर्क की परफॉर्मेंस पर मामूली असर देखने को मिल सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि Bluetooth बंद करते ही Wi-Fi की स्पीड अचानक कई गुना बढ़ जाएगी।
आज के ज्यादातर आधुनिक स्मार्टफोन और राउटर वायरलेस कनेक्शन को बेहतर तरीके से मैनेज करने में सक्षम होते हैं। डिवाइस उपलब्ध चैनल और कनेक्शन की स्थिति के अनुसार संचार को व्यवस्थित करते हैं। इसके अलावा कई आधुनिक राउटर 5 GHz या 6 GHz बैंड पर भी Wi-Fi उपलब्ध कराते हैं। इन बैंड में Bluetooth के साथ सीधे ओवरलैप की समस्या 2.4 GHz की तुलना में अलग होती है। इसलिए अगर आपका फोन 5 GHz Wi-Fi से जुड़ा है तो केवल Bluetooth बंद करने से इंटरनेट स्पीड में बड़ा बदलाव आने की संभावना कम रहती है।
Wi-Fi की स्पीड पर कई दूसरे कारकों का ज्यादा असर होता है। राउटर से दूरी बढ़ने पर सिग्नल कमजोर हो सकता है। दीवारें और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी कनेक्शन को प्रभावित कर सकते हैं। एक ही नेटवर्क से बहुत सारे डिवाइस जुड़े होने पर भी उपलब्ध बैंडविड्थ कई डिवाइस में बंट जाती है। इसके अलावा इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर की स्पीड और उस समय नेटवर्क पर मौजूद ट्रैफिक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अगर Wi-Fi बार बार स्लो हो रहा है तो सबसे पहले राउटर की लोकेशन जांचनी चाहिए। राउटर को ऐसी जगह रखना बेहतर होता है जहां से सिग्नल आसानी से आसपास के कमरों तक पहुंच सके। जरूरत पड़ने पर 5 GHz नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा सकता है। राउटर को रीस्टार्ट करना और फोन में नेटवर्क सेटिंग्स की जांच करना भी मददगार हो सकता है।
इसलिए Bluetooth बंद करने वाली वायरल ट्रिक को Wi-Fi स्पीड बढ़ाने का पक्का तरीका मानना सही नहीं है। कुछ खास परिस्थितियों में वायरलेस इंटरफेरेंस कम होने से मामूली सुधार महसूस हो सकता है लेकिन सामान्य स्थिति में Wi-Fi की स्पीड बढ़ाने के लिए राउटर की क्षमता और लोकेशन के साथ नेटवर्क बैंड का सही चुनाव ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी टेक्नोलॉजी टिप को अपनाने से पहले यह समझना जरूरी है कि वह वास्तव में किस परिस्थिति में काम करती है।
