गृह मंत्रालय ने नियमों में बदलाव का दिया सुझाव
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से पूर्व-अग्निवीरों की भर्ती के लिए मौजूदा नियमों में जरूरी संशोधन करने को कहा है। इसके तहत उन्हें लिखित परीक्षा के साथ शारीरिक दक्षता और शारीरिक मानक परीक्षा से भी छूट देने की सिफारिश की गई है।
केंद्र का तर्क है कि अग्निवीर सेना में भर्ती से पहले ही कठोर चयन प्रक्रिया और प्रशिक्षण से गुजरते हैं। ऐसे युवाओं के पास अनुशासन, शारीरिक दक्षता और आवश्यक कौशल पहले से मौजूद होता है। इसलिए सरकारी सेवाओं में उनकी भर्ती के दौरान दोबारा इसी तरह की परीक्षाएं लेने की आवश्यकता कम हो सकती है।
नागरिक सेवाओं और सुरक्षा बलों में तेजी से हो सकेगा समायोजन
गृह मंत्रालय के मुताबिक, सेना से बाहर आने के बाद पूर्व-अग्निवीरों के पास अनुशासन और सुरक्षा क्षेत्र का व्यावहारिक अनुभव होता है। यदि राज्य भर्ती नियमों में आवश्यक छूट देते हैं, तो इन युवाओं को नागरिक सेवाओं और सुरक्षा बलों में तेजी से समायोजित किया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार केंद्र के निर्देश के बाद उत्तराखंड में नई व्यवस्था लागू करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। कार्मिक विभाग दूसरे विभागों के साथ विचार-विमर्श कर रहा है। इसके लिए अग्निवीरों से संबंधित मौजूदा नियमावली में बदलाव किया जाएगा और इसका प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाएगा।
सचिव कार्मिक शैलेश बगौली ने बताया कि केंद्र की ओर से किए गए अनुरोध के बाद शासन स्तर पर नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इन ग्रुप-C पदों पर पहले से मिल रहा आरक्षण
उत्तराखंड में पूर्व-अग्निवीरों को कई ग्रुप-C पदों पर आरक्षण का लाभ मिल रहा है। इनमें पुलिस आरक्षी, उपनिरीक्षक, बंदी रक्षक, वन आरक्षी, आबकारी सिपाही और सचिवालय रक्षक जैसे पद शामिल हैं।
इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारतीय रिजर्व बटालियन, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), वन्यजीव रक्षक और खनन रक्षक के पदों पर भी 20% आरक्षण का लाभ देने की व्यवस्था जल्द लागू करने पर जोर दिया है।
केंद्र ने मांगा रिक्त पदों का पूरा ब्योरा
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उत्तराखंड सरकार से पूर्व-अग्निवीरों की भर्ती के लिए प्रस्तावित पदों की रिक्तियों का पूरा ब्योरा भी मांगा है। इसके लिए राज्य सरकार को एक तय प्रारूप दिया गया है।
इसमें महीनेवार, पदवार और श्रेणीवार रिक्तियों की जानकारी देनी होगी। नियमों में बदलाव और नई व्यवस्था लागू होने के बाद सेना से जल्द बाहर आने वाले अग्निवीरों के बैच को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।
