प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ को लेकर भारत की सोच के तीन प्रमुख स्तंभों सिक्योरिटी कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी को फिर से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अब इन विचारों को केवल विजन तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक परिणामों में बदलना होगा और इसके लिए सबसे पहली जरूरत शांति और सुरक्षा की है। पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ बेहद कड़ा संदेश देते हुए कहा कि केवल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई या जवाबी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है बल्कि आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करना जरूरी है। आतंकवाद की फंडिंग भर्ती कट्टरपंथ और आतंकियों को मिलने वाले सुरक्षित ठिकानों को खत्म किए बिना इस चुनौती का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि इस मुद्दे पर किसी तरह के दोहरे रवैये की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और सभी देशों को एकजुट होकर कार्रवाई करनी होगी।
प्रधानमंत्री ने नशीले पदार्थों की तस्करी को भी क्षेत्रीय सुरक्षा और युवा पीढ़ी के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि ड्रग ट्रैफिकिंग केवल अपराध नहीं बल्कि समाज और भविष्य के लिए बड़ा संकट है। सुरक्षा संबंधी खतरे संगठित अपराध सूचना सुरक्षा और नार्कोटिक्स जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एससीओ के तहत बनाए जा रहे केंद्रों को उन्होंने सकारात्मक कदम बताया।
वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने शांति के लिए संवाद और कूटनीति को सबसे प्रभावी रास्ता बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट ने साबित किया है कि किसी एक क्षेत्र में होने वाला संघर्ष केवल उसी इलाके तक सीमित नहीं रहता बल्कि उसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ता है। इसका सबसे अधिक नुकसान ग्लोबल साउथ के देशों को उठाना पड़ता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध और तनाव का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही खोजा जाना चाहिए।
पीएम मोदी ने साझा विकास और कनेक्टिविटी की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ते हैं व्यापार को आसान बनाते हैं और विकास के नए अवसर पैदा करते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी कनेक्टिविटी पहल में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने इसे एससीओ चार्टर की मूल भावना से भी जोड़ा।
प्रधानमंत्री ने एससीओ की सबसे बड़ी पूंजी सदस्य देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को बताया। उनके अनुसार महान सभ्यताओं संस्कृतियों और विचारों का यह संगठन तभी मजबूत होगा जब इसका लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचे। उन्होंने युवाओं के लिए नए अवसर खोलने उद्यमियों के लिए नए बाजार तैयार करने किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने और नागरिकों का जीवन बेहतर बनाने को सफलता की वास्तविक कसौटी बताया। पीएम मोदी ने सहयोग को केवल सरकारों तक सीमित न रखकर लोगों द्वारा संचालित बनाने की जरूरत बताई। स्टार्टअप फोरम यंग ऑथर्स कॉन्क्लेव और यंग साइंटिस्ट्स फोरम जैसे भारतीय प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने एससीओ के भविष्य को युवा शक्ति संवाद और जनसंपर्क से जोड़ने का संदेश दिया। बिश्केक के मंच से भारत ने साफ कर दिया कि आने वाले वर्षों में उसकी प्राथमिकता सुरक्षित शांतिपूर्ण और अधिक सहयोगपूर्ण विश्व व्यवस्था बनाने की होगी।
