यदि केवल अनुमान के तौर पर 1.92 फिटमेंट फैक्टर को आधार माना जाए तो वर्तमान में 18,000 रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर 34,560 रुपये हो सकती है। इसी प्रकार अन्य वेतन स्तरों पर भी नई बेसिक सैलरी का अनुमान लगाया जा रहा है। यह गणना केवल संभावित परिदृश्य को समझाने के लिए है और इसे अंतिम वेतन संरचना नहीं माना जा सकता।
अनुमानित गणना के अनुसार, 25,500 रुपये की मौजूदा बेसिक सैलरी बढ़कर लगभग 48,960 रुपये, 35,400 रुपये की बेसिक लगभग 67,968 रुपये, 44,900 रुपये की बेसिक करीब 86,208 रुपये तथा 56,100 रुपये की बेसिक लगभग 1,07,712 रुपये तक पहुंच सकती है। यह पूरा आकलन केवल 1.92 फिटमेंट फैक्टर के आधार पर किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बेसिक सैलरी में बदलाव देखकर वास्तविक वेतन वृद्धि का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। कर्मचारियों की कुल आय में महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA) और अन्य भत्तों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नया वेतन आयोग लागू होने के बाद इन सभी भत्तों की गणना के नियम भी बदल सकते हैं, जिससे वास्तविक ग्रॉस और इन-हैंड सैलरी प्रभावित होगी।
फिटमेंट फैक्टर दरअसल एक गुणांक होता है, जिसके माध्यम से वर्तमान बेसिक वेतन को गुणा करके संशोधित बेसिक वेतन निर्धारित किया जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी का वर्तमान बेसिक वेतन 35,400 रुपये है और 1.92 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो संशोधित बेसिक वेतन लगभग 67,968 रुपये होगा। इसी सिद्धांत के आधार पर सभी वेतन स्तरों की नई बेसिक सैलरी तय की जाती है।
वर्तमान समय में केंद्रीय कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है। इसलिए वेतन वृद्धि का वास्तविक आकलन करते समय मौजूदा बेसिक वेतन के साथ महंगाई भत्ते को भी शामिल करना आवश्यक माना जाता है। उदाहरण के लिए 18,000 रुपये की बेसिक सैलरी पर 60 प्रतिशत डीए जोड़ने के बाद कुल राशि 28,800 रुपये होती है। यदि संभावित नई बेसिक 34,560 रुपये मानी जाए तो दोनों के बीच का अंतर लगभग 5,760 रुपये रहता है। हालांकि इसे सीधे वास्तविक वेतन वृद्धि नहीं माना जा सकता क्योंकि अन्य भत्तों का पुनर्निर्धारण भी इसमें शामिल होगा।
गौरतलब है कि 7वें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिसके बाद न्यूनतम बेसिक वेतन 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया गया था। अब कर्मचारियों की निगाहें 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों और सरकार के फैसले पर टिकी हैं। आधिकारिक घोषणा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नया फिटमेंट फैक्टर कितना होगा और केंद्रीय कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों की बेसिक, ग्रॉस और इन-हैंड सैलरी में वास्तविक बदलाव कितना आएगा।
