सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए पोस्ट में दावा किया गया कि प्रदर्शन के दौरान कई लोगों की जान गई। कुछ पोस्ट में एक युवती की मौके पर मौत होने का भी दावा किया गया, जबकि कुछ वीडियो में घायल लोगों के दृश्य दिखाकर उन्हें मौत की घटना से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। इन पोस्टों के वायरल होने के बाद मामले ने व्यापक चर्चा का रूप ले लिया।
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक इकाई ने इन दावों की जांच के बाद स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान किसी भी व्यक्ति की मौत होने संबंधी दावा सही नहीं है। फैक्ट चेक इकाई ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही ऐसी जानकारी तथ्यों पर आधारित नहीं है। इसके साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे केवल आधिकारिक और सत्यापित स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें तथा भ्रामक सामग्री को आगे साझा करने से बचें।
दिल्ली पुलिस ने भी इस संबंध में अपना पक्ष स्पष्ट किया है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान किसी भी व्यक्ति की मृत्यु की सूचना दर्ज नहीं हुई है। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर मौत और शव छिपाने जैसे दावे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने और किसी भी सूचना की पुष्टि आधिकारिक माध्यमों से करने की सलाह दी है।
हालांकि प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। उनका कहना है कि कुछ लोगों को सिर में चोट, फ्रैक्चर और अन्य गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। लेकिन इन घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में घायल होने की घटनाओं को मौत की खबरों के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई।
इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ लोगों ने आधिकारिक स्पष्टीकरण का समर्थन किया, जबकि कुछ ने वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल उठाए। कई उपयोगकर्ताओं ने यह भी मांग की कि वायरल वीडियो और उसमें दिखाई देने वाली घटनाओं के बारे में अधिक स्पष्ट और प्रमाणिक जानकारी सार्वजनिक की जाए ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील घटनाओं के दौरान सोशल मीडिया पर अपुष्ट दावे और पुराने या संदर्भ से हटकर वीडियो तेजी से फैलते हैं, जिससे गलत सूचना का प्रसार होता है। ऐसे मामलों में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना और तथ्यात्मक जानकारी साझा करना बेहद आवश्यक होता है। इससे न केवल अफवाहों पर रोक लगती है, बल्कि सामाजिक तनाव और भ्रम की स्थिति भी कम होती है।
इस पूरे मामले में आधिकारिक एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि वायरल दावों की सत्यता स्थापित नहीं हुई है। ऐसे में नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी वीडियो, तस्वीर या संदेश को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करें और केवल प्रमाणित जानकारी पर ही भरोसा करें।
