विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में एकजुट होकर छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। उनका कहना था कि देशभर के छात्र अपनी विभिन्न मांगों और समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी चिंताओं का समाधान निकालने के बजाय प्रशासनिक स्तर पर सख्ती दिखाई जा रही है। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति असंवेदनशील रवैया बताते हुए सरकार से तत्काल बातचीत शुरू करने की मांग की।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि छात्र अपने भविष्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं की मेहनत, शिक्षा और भविष्य किसी भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि छात्रों की बात को लगातार नजरअंदाज किया जाएगा तो इससे शिक्षा व्यवस्था के प्रति उनका विश्वास कमजोर हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सरकार को इस अधिकार का सम्मान करना चाहिए।
कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने भी छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया, जिससे यह संदेश जाता है कि सरकार असहमति की आवाज सुनने के बजाय उसे दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं की समस्याओं का समाधान संवाद और संवेदनशीलता से किया जाना चाहिए, न कि कठोर कार्रवाई से। इसी विरोध को दर्ज कराने के लिए कांग्रेस सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे।
कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद के. सुरेश ने कहा कि काले वस्त्र पहनकर किया गया प्रदर्शन केवल छात्रों के समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्षी नेताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के विरोध का भी प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसदों के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। इसी कारण कांग्रेस ने इस विरोध को प्रतीकात्मक रूप से ‘काला दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया।
कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी तय करते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता होना चाहिए और शिक्षा से जुड़े गंभीर सवालों पर स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए राजनीतिक जवाबदेही की आवश्यकता पर बल दिया।
इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों ने भी कांग्रेस का समर्थन किया। तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना सरकार का दायित्व है और उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाना चाहिए। संसद परिसर में हुए इस विरोध प्रदर्शन के बाद छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस विषय पर संसद के भीतर और बाहर व्यापक चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
