कब लगेंगे सावन में ग्रहण?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा। यह खग्रास सूर्य ग्रहण होगा, जो आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और पुर्तगाल सहित कुछ देशों में दिखाई देगा।
28 अगस्त 2026 – चंद्र ग्रहण
साल का अंतिम आंशिक चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन लगेगा। यह ग्रहण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों में दिखाई देगा।
क्या भारत में रहेगा सूतक काल?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूतक काल तभी प्रभावी माना जाता है जब ग्रहण संबंधित क्षेत्र में दिखाई दे। चूंकि वर्ष 2026 के ये दोनों ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होंगे, इसलिए भारत में इनका सूतक काल मान्य नहीं होगा। ऐसे में श्रद्धालुओं को अपनी नियमित पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठानों में किसी प्रकार का बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है।
क्या पूजा-पाठ पर पड़ेगा कोई असर?
ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण मंदिरों के कपाट बंद करने या पूजा-अर्चना पर रोक लगाने का कोई नियम लागू नहीं होगा। श्रद्धालु सावन के सोमवार सहित अन्य शुभ तिथियों पर भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और नियमित पूजा-अर्चना पहले की तरह कर सकते हैं।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
हालांकि भारत में सूतक काल प्रभावी नहीं रहेगा, फिर भी धार्मिक परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कुछ सावधानियां बरतना शुभ माना गया है।
– सावन के पवित्र महीने में मन में नकारात्मक विचारों को स्थान न दें और सकारात्मक सोच बनाए रखें।
– भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और विश्वास बनाए रखते हुए मंत्र जाप एवं नियमित पूजा करें।
– ग्रहण को लेकर सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों या भ्रामक जानकारियों पर विश्वास न करें।
– सावन में दान-पुण्य का विशेष महत्व माना गया है। ग्रहण वाले दिन भी अपनी श्रद्धा के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता और सात्विक दान किया जा सकता है।
