सामान्य मौसमी बुखार की शुरुआत प्रायः हल्के लक्षणों के साथ होती है। इसमें हल्का या मध्यम बुखार, शरीर में दर्द, गले में खराश, हल्की खांसी, थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। पर्याप्त आराम, पर्याप्त पानी पीने, हल्का भोजन और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवाओं से अधिकांश लोगों की स्थिति दो से तीन दिनों में बेहतर होने लगती है। इस दौरान भूख कम लगना और सामान्य कमजोरी महसूस होना भी आम बात है, लेकिन गंभीर लक्षण आमतौर पर नहीं दिखाई देते।
इसके विपरीत डेंगू का बुखार अक्सर अचानक और तेज तापमान के साथ शुरू होता है। मरीज को तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में अत्यधिक पीड़ा महसूस हो सकती है। कई मामलों में शरीर पर लाल रंग के छोटे-छोटे दाने दिखाई देने लगते हैं, जो डेंगू का महत्वपूर्ण संकेत माने जाते हैं। बीमारी बढ़ने पर अत्यधिक कमजोरी, उल्टी, मसूड़ों या नाक से खून आना और प्लेटलेट्स की संख्या में कमी जैसी गंभीर समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि बुखार लगातार तीन दिन से अधिक बना रहे, बार-बार तेज हो जाए, शरीर पर दाने उभर आएं या खून आने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। ऐसे मामलों में रक्त जांच और प्लेटलेट्स की निगरानी से बीमारी की समय पर पहचान संभव होती है, जिससे जटिलताओं का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
मानसून के दौरान बीमारी से बचाव के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। घर और आसपास पानी जमा न होने दें ताकि मच्छरों का प्रजनन न हो सके। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, मच्छरदानी या रिपेलेंट का उपयोग करें और स्वच्छ भोजन व पर्याप्त पानी का सेवन करें। यदि बुखार हो जाए तो स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक सुरक्षित रहता है, क्योंकि समय पर सही उपचार ही डेंगू जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
