यह जीत सिंधु के करियर के लिए बेहद खास मानी जा रही है। दिसंबर 2024 में सैयद मोदी इंटरनेशनल जीतने के बाद यह उनका पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब है। साथ ही सुपर 750 या उससे ऊपर के स्तर का खिताब जीतने का उनका सात वर्षों का लंबा इंतजार भी समाप्त हो गया।
फाइनल मुकाबले में सिंधु ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने शुरुआती अंक तेजी से जुटाकर बढ़त बनाई। हालांकि अकाने यामागुची ने शानदार वापसी करते हुए मुकाबले को बराबरी पर ला दिया। दोनों खिलाड़ियों के बीच लंबे और रोमांचक रैलियों का दौर चलता रहा। पहले गेम में एक समय स्कोर 17-17 से बराबर था लेकिन सिंधु ने दबाव में बेहतरीन संयम दिखाते हुए लगातार चार अंक हासिल किए और पहला गेम 21-17 से अपने नाम कर लिया।
दूसरे गेम में भी भारतीय स्टार ने अपनी लय बरकरार रखी। उन्होंने शुरुआत में ही मजबूत बढ़त बना ली और लगातार आक्रामक स्मैश तथा सटीक शॉट्स से यामागुची पर दबाव बनाए रखा। जापानी खिलाड़ी ने वापसी की कोशिश करते हुए स्कोर 18-17 तक पहुंचाया लेकिन सिंधु ने अनुभव का शानदार परिचय दिया और लगातार तीन अंक जीतकर मुकाबला समाप्त कर दिया। 21-17 से दूसरा गेम जीतते ही सिंधु ने खिताब पर कब्जा जमा लिया।
पूरे टूर्नामेंट में सिंधु का प्रदर्शन शानदार रहा। प्री क्वार्टर फाइनल में उन्होंने विश्व की पांचवें नंबर की खिलाड़ी हान यू को हराया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में उनकी प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों के चोटिल होकर हटने से उन्हें राहत जरूर मिली लेकिन फाइनल में उन्होंने अपने दमदार खेल से साबित कर दिया कि वह फिर से अपनी सर्वश्रेष्ठ लय में लौट चुकी हैं।
यह खिताबी जीत भारतीय बैडमिंटन के लिए भी बड़ी उपलब्धि है। लंबे समय बाद सिंधु ने बड़े मंच पर खिताब जीतकर यह संदेश दिया है कि वह आने वाले विश्व स्तरीय टूर्नामेंटों में भी मजबूत दावेदार रहेंगी। उनकी इस सफलता से भारतीय बैडमिंटन को नई ऊर्जा मिली है और युवा खिलाड़ियों के लिए भी यह बड़ी प्रेरणा साबित होगी।
