फिल्म उद्योग में अपने कदम जमाने वाले नवीन निश्चल ने वर्ष 1970 में प्रदर्शित हुई सुपरहिट फिल्म ‘सावन भादो’ से अभिनेत्री रेखा के साथ मुख्य अभिनेता के रूप में पदार्पण किया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई, जिसने नवीन को रातोंरात निर्माताओं की पहली पसंद बना दिया। इसके ठीक अगले वर्ष 1971 में उनकी पांच बड़ी फिल्में प्रदर्शित हुईं, जिनमें ‘बुड्ढा मिल गया’, ‘नादान’, ‘संसार’, ‘गंगा तेरा पानी अमृत’ और ‘परवाना’ शामिल थीं। इन फिल्मों की निरंतर सफलता ने उनके भीतर एक गहरे अहंकार को जन्म दे दिया, जो आगे चलकर उनके करियर के पतन का मुख्य कारण बना।
इसी दौर में आई फिल्म ‘परवाना’ के निर्माण और प्रचार के दौरान एक ऐसी घटना घटी, जिसने फिल्म जगत में काफी सुर्खियां बटोरीं। इस फिल्म में नवीन निश्चल मुख्य भूमिका में थे, जबकि संघर्ष कर रहे अमिताभ बच्चन एक बेहद छोटे और नकारात्मक किरदार में नजर आए थे। फिल्म के प्रचार प्रसार के दौरान नवीन निश्चल ने अमिताभ बच्चन को अपने स्तर से बहुत छोटा अभिनेता मानते हुए उनके साथ संयुक्त तस्वीरें खिंचवाने से साफ मना कर दिया था। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने इसी घमंड के चलते ‘मेरे अपने’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ तथा ऐतिहासिक फिल्म ‘दीवार’ जैसी बड़ी फिल्मों के प्रस्तावों को बेहद छोटा और अपने स्तर के विपरीत समझकर ठुकरा दिया था, जिन्हें बाद में अमिताभ बच्चन और शशि कपूर ने स्वीकार कर इतिहास रच दिया।
सिनेमाई गलियारों में उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, शुरुआती दौर में मिली इस अपार सफलता ने नवीन निश्चल के व्यवहार को पूरी तरह बदल दिया था। सह-कलाकारों के प्रति सम्मान की कमी, फिल्म के सेट पर अनुचित नखरे दिखाना, अत्यधिक नशा और निर्देशकों व निर्माताओं के सुझावों को पूरी तरह नजरअंदाज करने जैसी गलत आदतों ने धीरे-धीरे उन्हें फिल्म उद्योग से अलग-थलग कर दिया। निर्माता-निर्देशकों ने उनकी इन हरकतों के कारण उन्हें फिल्मों में लेना बंद कर दिया, जिसके चलते वह देखते ही देखते गुमनामी के अंधेरे में खो गए और गंभीर आर्थिक संकट से घिर गए।
समय का चक्र ऐसा बदला कि जिस अमिताभ बच्चन को कभी नवीन निश्चल ने अपमानित किया था, वही बिग बी सत्तर और अस्सी के दशक में भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार बनकर उभरे। अपनी गुरबत और तंगहाली के दिनों में नवीन निश्चल को विवश होकर उसी अभिनेता के पास जाना पड़ा, जिसकी उन्होंने कभी उपेक्षा की थी। उन्होंने अमिताभ बच्चन से अपने लिए काम की गुहार लगाई और उनके सहयोग से बिग बी की ही एक फिल्म में बेहद छोटा सा सहायक रोल स्वीकार कर अपनी आजीविका चलाई। यह घटनाक्रम आज भी फिल्म उद्योग में उगते सूरज को सलाम करने और मानवीय व्यवहार की अनिश्चितता का एक बड़ा उदाहरण माना जाता है।
