अब मारुति सुजुकी ने इस आदेश को चुनौती देने की तैयारी कर ली है। कंपनी का कहना है कि ग्राहक को दी गई ग्रैंड विटारा पहले से ही E20 फ्यूल के लिए पूरी तरह उपयुक्त थी और इसकी जानकारी कार के यूजर मैनुअल में भी दी गई थी। कंपनी ने यह भी दावा किया कि जांच के दौरान कार में मिलावटी ईंधन की बात सामने आई थी और कोर्ट के आदेश में इस महत्वपूर्ण तथ्य को ध्यान में नहीं रखा गया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला छत्तीसगढ़ के रायपुर का है। डॉक्टर प्रेमराज डेब्टा ने जून 2024 में नेक्सा डीलरशिप से मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस वेरिएंट खरीदा था। डीलरशिप की ओर से उन्हें बताया गया था कि कार दिसंबर 2023 में बनी हुई है, लेकिन बाद में कंज्यूमर फोरम के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली कि उनकी कार का निर्माण जनवरी 2023 में हुआ था।
डॉक्टर प्रेमराज के अनुसार, 11 नवंबर 2024 को उनकी कार में खराबी आई और डैशबोर्ड पर इंजन मालफंक्शन का संकेत दिखाई देने लगा। जब वह कार को डीलरशिप लेकर गए तो उन्हें बताया गया कि वाहन में मिलावटी पेट्रोल के कारण यह समस्या आई है। इसके बाद कार का पूरा फ्यूल टैंक खाली कर दोबारा ईंधन भरा गया। ग्राहक ने इस मामले की शिकायत पेट्रोल पंप और मारुति सुजुकी से भी की। पेट्रोल पंप की ओर से जवाब दिया गया कि उनके यहां उपलब्ध पेट्रोल में कोई समस्या नहीं थी।
कुछ समय बाद कार में फिर खराबी आने लगी और उसे दोबारा सर्विस सेंटर लाया गया। ग्राहक का दावा है कि यह समस्या बार-बार दोहराती रही और करीब एक महीने तक कार वर्कशॉप में खड़ी रही। बाद में डीलरशिप ने ईमेल के जरिए बताया कि मिलावटी पेट्रोल के कारण इंजन खराब हुआ है और इसे बदलने की जरूरत होगी। कंपनी ने इंजन रिप्लेसमेंट का खर्च करीब 5.30 लाख रुपये बताया और कहा कि यह वारंटी के तहत कवर नहीं होगा।
कंज्यूमर कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
मामला रायपुर कंज्यूमर कोर्ट पहुंचने के बाद मारुति और डीलरशिप ने दलील दी कि ग्रैंड विटारा मॉडल E20 पेट्रोल के साथ पूरी तरह कंप्लायंट है। हालांकि, कोर्ट कंपनी की दलीलों से सहमत नहीं हुआ और ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने मारुति सुजुकी को निर्देश दिया कि वह ग्राहक को नई E20 कंप्लायंट कार उपलब्ध कराए या फिर वाहन की कीमत करीब 20.5 लाख रुपये वापस करे।
इसके अलावा कोर्ट ने ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी के लिए 1 लाख रुपये और कानूनी प्रक्रिया में हुए खर्च के लिए 10 हजार रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया। अब मारुति सुजुकी ने इस फैसले को बड़ी अदालत में चुनौती देने का निर्णय लिया है। कंपनी का कहना है कि वह अदालत के सामने सभी तथ्यों और तकनीकी पहलुओं को रखेगी।
