देहरादून। तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में बच्चों और युवाओं के मानसिक, शारीरिक तथा भावनात्मक विकास को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। इसी चुनौती के समाधान की दिशा में देहरादून स्थित मिसरा पट्टी के ॐ कल्याणम वेलनेस सेंटर में आयोजित “यंग तपस्वी” प्रशिक्षण शिविर ने समग्र व्यक्तित्व विकास का संदेश दिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें जीवन कौशल, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ना रहा। आयोजकों का मानना है कि आज की शिक्षा व्यवस्था जानकारी तो दे रही है, लेकिन जीवन जीने की कला, तनाव प्रबंधन और भावनात्मक संतुलन जैसे विषयों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
ॐ कल्याणम से जुड़े सचिन त्यागी ने कहा कि बच्चों के भीतर सामाजिक कौशल, शारीरिक फिटनेस, मानसिक दृढ़ता और सकारात्मक सोच का विकास समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनका कहना है कि व्यक्ति का आंतरिक विकास ही समाज और राष्ट्र के स्थायी विकास की आधारशिला बन सकता है।
कार्यक्रम के संयोजक राहुल सिंह पंवार ने बताया कि यंग तपस्वी अब राष्ट्रीय स्तर का स्वरूप ले चुका है। शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से बच्चों ने भाग लिया, जबकि प्रशिक्षण देने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से अनुभवी प्रशिक्षक पहुंचे। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य बच्चों को उनकी आंतरिक क्षमता से परिचित कराना और उन्हें संतुलित जीवन दृष्टि प्रदान करना है।
शिविर के दौरान योग, ध्यान, शारीरिक प्रशिक्षण, व्यक्तित्व विकास, संवाद कला, नेतृत्व निर्माण, आत्मअनुशासन और भावनात्मक प्रबंधन जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। इन सत्रों के माध्यम से बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और आत्मिक रूप से सशक्त बनने के लिए प्रेरित किया गया।
आयोजकों का मानना है कि भारत का भविष्य केवल तकनीकी और आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि ऐसी पीढ़ी से मजबूत होगा जो मानसिक रूप से स्वस्थ, नैतिक मूल्यों से समृद्ध और सामाजिक रूप से संवेदनशील हो। इसी सोच के साथ यंग तपस्वी कार्यक्रम बच्चों और युवाओं को आत्मविकास के माध्यम से राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का प्रयास कर रहा है।
यह पहल केवल एक प्रशिक्षण शिविर नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को संतुलित, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।
