करीब 35 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने के बाद सामने आए शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, लेबर पार्टी को 29.9 प्रतिशत और नेशनल पार्टी को 29.4 प्रतिशत वोट मिले हैं। दोनों दलों के बीच केवल 0.5 प्रतिशत का अंतर है। शुरुआती रुझानों में कभी नेशनल पार्टी आगे रही तो कभी लेबर पार्टी ने बढ़त बनाई। हालांकि, ये आंकड़े अंतिम परिणाम नहीं हैं और आगे की मतगणना के साथ तस्वीर बदल सकती है।
अन्य राजनीतिक दलों में ग्रीन पार्टी को 14.1 प्रतिशत, एसीटी न्यूजीलैंड को 10.5 प्रतिशत और न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी को 9.3 प्रतिशत वोट मिले हैं। वहीं, ऑपरचुनिटी पार्टी को 5.4 प्रतिशत मत प्राप्त हुए हैं। न्यूजीलैंड की चुनाव प्रणाली के तहत संसद में प्रतिनिधित्व पाने के लिए राजनीतिक दल को सामान्य तौर पर कम से कम पांच प्रतिशत पार्टी वोट हासिल करना होता है। इस लिहाज से ऑपरचुनिटी पार्टी भी संसद में अपनी जगह बनाने की स्थिति में दिखाई दे रही है।
मौजूदा प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के नेतृत्व में नेशनल पार्टी गठबंधन सरकार चला रही है। दूसरी ओर, लेबर पार्टी के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री क्रिस हिपकिंस सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं। वर्ष 2023 के आम चुनाव में लेबर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। इस बार पार्टी ने महंगाई, स्वास्थ्य सुविधाओं और आम नागरिकों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया।
चुनाव प्रचार के दौरान देश की कमजोर आर्थिक स्थिति और बढ़ती बेरोजगारी भी चर्चा के केंद्र में रही। न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था लंबे समय से आर्थिक सुस्ती का सामना कर रही है। बेरोजगारी दर 5.7 प्रतिशत तक पहुंचने और घरेलू खर्चों में बढ़ोतरी ने मतदाताओं की चिंताएं बढ़ाई हैं। नेशनल पार्टी ने बजट घाटा कम करने और वित्तीय अनुशासन के माध्यम से आर्थिक स्थिति सुधारने का वादा किया है। वहीं, लेबर पार्टी ने स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन को अधिक किफायती बनाने पर जोर दिया है।
इस चुनाव में ऑपरचुनिटी पार्टी की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। इसका नेतृत्व किउले वोंग कर रही हैं। पार्टी को पांच प्रतिशत से अधिक वोट मिलने के कारण संसद में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। हालांकि, क्रिस्टोफर लक्सन पहले ही इस पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार कर चुके हैं। इसके बावजूद चुनावी नतीजों के बाद सरकार गठन के लिए अन्य छोटे दलों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
न्यूजीलैंड में मिश्रित सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व यानी एमएमपी चुनाव प्रणाली लागू है। इसके तहत मतदाता दो वोट डालते हैं। पहला वोट अपने निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार के लिए और दूसरा राजनीतिक पार्टी के लिए होता है। संसद में दलों की सीटों का निर्धारण मुख्य रूप से पार्टी को मिले कुल वोटों के अनुपात के आधार पर किया जाता है। इसलिए किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने पर गठबंधन सरकार बनना सामान्य प्रक्रिया है।
वर्ष 2023 के चुनाव में नेशनल पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे न्यूजीलैंड फर्स्ट और एसीटी पार्टी का समर्थन लेना पड़ा था। इस बार भी संसद की कुल 120 सीटों में बहुमत हासिल करने के लिए 61 सीटों की जरूरत होगी। चुनाव आयोग ने आधिकारिक परिणाम 27 नवंबर को घोषित करने का कार्यक्रम तय किया है। विदेशों में रहने वाले नागरिकों के मतों और विशेष मतों की गिनती भी अंतिम परिणाम में शामिल होगी। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर हैं कि अंतिम नतीजों में कौन सा दल सबसे आगे निकलता है और सत्ता गठन के लिए किसे छोटे दलों का साथ मिलता है।
