उदित राज ने कहा कि हिंदुत्व को लेकर चर्चा करते समय यह सवाल भी उठना चाहिए कि आखिर हिंदू किसे कहा जाए। उनके अनुसार, भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को केवल एक परिभाषा में सीमित करना आसान नहीं है। उन्होंने इस विषय पर खुलकर बहस करने की जरूरत बताई और कहा कि इस तरह के मुद्दों पर चर्चा करने का साहस दिखाया जाना चाहिए।
आजादी की लड़ाई में विभिन्न समुदायों के योगदान का उल्लेख करते हुए उदित राज ने दावा किया कि स्वतंत्रता संग्राम में 61 हजार मुसलमानों और 8 हजार सिखों ने कुर्बानी दी थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में अलग-अलग समुदायों के लोगों ने योगदान दिया और शहीद होने वालों तथा संघर्ष करने वालों के बलिदान को याद रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि सवर्ण हिंदुओं का योगदान तुलनात्मक रूप से कम रहा था। उनके मुताबिक, स्वतंत्रता संग्राम के योगदान को किसी एक धार्मिक पहचान तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस प्रवक्ता ने संसद में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच जारी टकराव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की चुनौती दी है, लेकिन संसद में विपक्ष को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है। उदित राज का आरोप है कि लोकसभा अध्यक्ष की ओर से कई बार विपक्षी सदस्यों के माइक बंद कर दिए जाते हैं और उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं मिलता। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि विपक्ष के सदस्यों की ओर से हंगामा होने के कारण सदन में सार्थक चर्चा प्रभावित होती है।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों पर भी टिप्पणी की। उदित राज ने कहा कि आजादी की लड़ाई में संघ से जुड़े लोगों की भूमिका विशेष रूप से दिखाई नहीं देती थी। ऐसे में हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को लेकर उनके विचारों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पूर्वजों ने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया, उनके द्वारा राष्ट्रवाद को लेकर प्रमाण पत्र बांटना विरोधाभासी है। यह उनका राजनीतिक और वैचारिक आरोप है।
इस दौरान उदित राज ने झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। अंसारी ने दावा किया था कि 40 लाख युवा राहुल गांधी के संकेत का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि भारत की स्थिति बांग्लादेश और नेपाल से भी खराब हो सकती है। इस पर उदित राज ने सवाल किया कि ये 40 लाख युवा कहां हैं। उन्होंने कहा कि संख्या 40 लाख हो या चार करोड़, कांग्रेस का संघर्ष लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से ही चलेगा।
बांग्लादेश और नेपाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए उदित राज ने स्पष्ट किया कि उनका राजनीतिक रास्ता हिंसा या अराजकता का नहीं है। उन्होंने नेपाल में हिंसक घटनाओं के दौरान ऐतिहासिक धरोहरों और संसद को नुकसान पहुंचाए जाने तथा बांग्लादेश में हुई हिंसा को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, भारत में किसी भी राजनीतिक संघर्ष का आधार अहिंसा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया होनी चाहिए।
उदित राज ने केंद्रीय गृह मंत्री पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में अराजकता का माहौल पैदा करने में गृह मंत्री की भूमिका है और उनका प्राथमिक दायित्व कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। उन्होंने गृह मंत्री की राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई बार उनकी भूमिका ऐसी दिखाई देती है, जैसे वे सरकार में नहीं बल्कि विपक्ष में हों। उनके इन बयानों के बाद हिंदुत्व की परिभाषा, स्वतंत्रता संग्राम में विभिन्न समुदायों की भूमिका और लोकतांत्रिक राजनीति को लेकर बहस फिर चर्चा में आ गई है।
