किरेन रिजिजू ने नसीरुद्दीन शाह का वीडियो साझा करते हुए कहा कि वह अभिनेता का सम्मान करते थे और उन्हें पसंद भी करते थे, लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि उनकी सोच इस तरह की हो सकती है। रिजिजू ने अपनी प्रतिक्रिया में शाह को ‘खतरनाक दिमागी नक्सल’ बताया और कहा कि ऐसी सोच भारत के लोकतंत्र के लिए अत्यंत हानिकारक है। जिस वीडियो पर उन्होंने प्रतिक्रिया दी, उसमें शाह कहते सुनाई देते हैं कि वह गर्व के साथ खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहते हैं।
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नीतीश राणे ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि नसीरुद्दीन शाह पाकिस्तान की स्क्रिप्ट पढ़ रहे हैं और इसके लिए उन्हें भुगतान किया जाता है। राणे ने अभिनेता की आलोचना करते हुए उनकी बातों को गंभीरता से लेने पर भी सवाल उठाए। ये आरोप राणे की ओर से लगाए गए हैं; इनके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण खबर में नहीं दिया गया है।
नसीरुद्दीन शाह ने अपने वीडियो में सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि उन्हें राष्ट्रविरोधी और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ जैसे नामों से पुकारा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र और शिक्षा संस्थानों को खतरे में डाला जा रहा है। शाह ने सरकार से सवाल किया कि युवाओं का हौसला तोड़ने और शैक्षणिक संस्थानों को प्रभावित करने के लिए और क्या किया जाएगा। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं को याद रखा जाएगा।
शाह ने 24 अक्टूबर को जारी एक अन्य वीडियो में सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) के छात्रों का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल चुनाव में जीत के बाद भाजपा उन लोगों से बदला लेने की कोशिश कर रही है, जो उसकी विचारधारा और नीतियों से सहमत नहीं हैं। उनके मुताबिक, संस्थान के छात्रों और भविष्य के फिल्म निर्माताओं को प्रशासन से जवाबदेही मांगने के बदले कारण बताओ नोटिस दिए गए, निगरानी में रखा गया, धमकियां दी गईं और छात्रावास खाली करने को कहा गया।
अभिनेता ने यह भी कहा कि सरकार छात्रों को डराने या उनका विचार बदलने की कोशिश कर सकती है, लेकिन ऐसा सफल नहीं होगा। उन्होंने विद्यार्थियों को देश और समाज की वास्तविक स्थिति सामने लाने वाले भावी फिल्मकार बताया। शाह का कहना था कि युवा भविष्य में अपने काम के जरिए देश के बारे में सच्चाई सामने रखेंगे।
एसआरएफटीआई से जुड़े मामले को लेकर पहले भी राजनीतिक और सार्वजनिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। शाह ने संस्थान के छात्रों के साथ कथित व्यवहार पर सवाल उठाए हैं, जबकि केंद्र सरकार के मंत्री ने उनके बयान की आलोचना की है। इस तरह मामला अब शिक्षा संस्थानों में छात्रों के अधिकार, सरकार की नीतियों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर चल रही बहस से भी जुड़ गया है।
