नई दिल्ली ।प्रशांत महासागर में स्थित जापान का मियाके-जिमा द्वीप अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ ज्वालामुखी से निकलने वाली जहरीली गैस के खतरे के लिए भी जाना जाता है। यहां रहने वाले लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में सुरक्षा के विशेष उपाय अपनाने पड़ते हैं। गैस मास्क रखना उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा है। बाजार में खरीदारी करने वाले लोग हों, सड़क पर घूमते बच्चे हों या समुद्र में मछली पकड़ने जाने वाले मछुआरे, सभी को संभावित खतरे के प्रति सतर्क रहना पड़ता है। हवा में जहरीली गैस का स्तर बढ़ने पर चेतावनी प्रणाली के जरिए लोगों को सावधान किया जाता है।
जापान की राजधानी टोक्यो से लगभग 180 किलोमीटर दक्षिण में स्थित मियाके-जिमा, टोक्यो महानगर प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है। दूर से यह द्वीप हरी-भरी पहाड़ियों और नीले समुद्र से घिरा खूबसूरत स्थान दिखाई देता है। हालांकि, इसके बीचों-बीच स्थित माउंट ओयामा नामक सक्रिय ज्वालामुखी यहां के निवासियों के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इस ज्वालामुखी से सल्फर डाइऑक्साइड गैस निकलती है, जो अधिक मात्रा में सांस के जरिए शरीर में पहुंचने पर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है।
मियाके-जिमा का इतिहास ज्वालामुखी विस्फोटों से जुड़ा रहा है। वर्ष 2000 में माउंट ओयामा में कई शक्तिशाली विस्फोट हुए, जिसके बाद वातावरण में बड़ी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड फैल गई। स्थिति गंभीर होने पर सितंबर 2000 में जापानी सरकार ने पूरे द्वीप को खाली कराने का आदेश दिया। वहां रहने वाले लगभग 3,600 लोगों को जहाजों और सैन्य हेलिकॉप्टरों के जरिए टोक्यो के मुख्य भूभाग पर पहुंचाया गया। इसके बाद कई वर्षों तक द्वीप पर सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा और वैज्ञानिकों तथा अनुसंधान दलों को विशेष सुरक्षा उपायों के साथ वहां जाने की अनुमति दी गई।
समय के साथ ज्वालामुखी से निकलने वाली गैस के स्तर और परिस्थितियों की समीक्षा की गई। इसके बाद लोगों को धीरे-धीरे द्वीप पर लौटने की अनुमति मिली। हालांकि, वापसी के साथ सुरक्षा संबंधी सावधानियों का पालन करना जरूरी बना रहा। गैस मास्क रखना और चेतावनी संकेतों पर ध्यान देना यहां के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
द्वीप पर हवा में सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा पर नजर रखने के लिए गैस निगरानी स्टेशन लगाए गए हैं। इनकी मदद से गैस के स्तर में होने वाले बदलावों का पता लगाया जाता है। चेतावनी प्रणाली के जरिए लोगों को संभावित खतरे की सूचना दी जाती है, ताकि वे समय रहते सुरक्षा संबंधी कदम उठा सकें। गैस का स्तर खतरनाक होने पर लोगों को मास्क पहनने और सुरक्षित स्थान की ओर जाने की सलाह दी जाती है।
आज मियाके-जिमा में लगभग 2,200 लोग रहते हैं। यहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को गैस के खतरे और सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक रहना पड़ता है। घरों, कार्यालयों और सार्वजनिक इमारतों में हवा को साफ रखने के लिए विशेष फिल्टरिंग व्यवस्था का भी इस्तेमाल किया जाता है। जरूरत पड़ने पर लोग सुरक्षित आश्रय स्थलों में जाकर स्थिति सामान्य होने का इंतजार करते हैं।
इस द्वीप की परिस्थितियां पर्यटकों, भूवैज्ञानिकों और पर्यावरण वैज्ञानिकों के लिए भी आकर्षण का विषय हैं। यहां आने वाले लोगों को स्थानीय सुरक्षा नियमों का पालन करना पड़ता है। ज्वालामुखी से प्रभावित भूभाग और प्राकृतिक परिस्थितियों का अध्ययन करने के लिए भी लोग यहां पहुंचते हैं।
मियाके-जिमा की कहानी बताती है कि प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम वाले क्षेत्रों में जीवन चलाने के लिए सतर्कता, तकनीक और तैयारी कितनी महत्वपूर्ण हैं। यहां गैस मास्क केवल सुरक्षा उपकरण नहीं, बल्कि उस खतरे की लगातार याद दिलाने वाला साधन है, जिसके बीच स्थानीय लोग अपना जीवन आगे बढ़ा रहे हैं।
