तीसरी तिमाही के बाजार आंकड़ों के अनुसार, भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट सालाना आधार पर 20 प्रतिशत घट गई और करीब दस साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। इस गिरावट के पीछे मेमोरी की बढ़ती कीमतों और उसके कारण स्मार्टफोन महंगे होने को प्रमुख वजह बताया गया है। कीमतों में बढ़ोतरी से ग्राहकों की मांग प्रभावित हुई, जिसका असर कई कंपनियों की बिक्री और शिपमेंट पर पड़ा। खास बात यह रही कि त्योहारी सीजन के दौरान भी कंपनियों ने अपने स्टॉक में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं की। कई वर्षों बाद बाजार में ऐसी स्थिति देखने को मिली।
कुल बाजार में गिरावट के बावजूद सैमसंग ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए भारत के स्मार्टफोन ब्रैंड्स में पहला स्थान हासिल किया। कंपनी ने लगातार नौ तिमाहियों के बाद शीर्ष स्थान पर वापसी की है। बाजार में उसकी हिस्सेदारी 17 प्रतिशत रही। सैमसंग की गैलेक्सी ए सीरीज की अच्छी बिक्री को इस सफलता की प्रमुख वजहों में शामिल किया गया है। इसके अलावा, कंपनी के नए फोल्डेबल स्मार्टफोन को भी ग्राहकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली।
वीवो 16 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। हालांकि, इस आंकड़े में आईकू की हिस्सेदारी शामिल नहीं है। जुलाई से सितंबर के दौरान वीवो की टी सीरीज और वाई सीरीज के स्मार्टफोन ने कंपनी की बिक्री को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। सैमसंग और वीवो के बीच बाजार हिस्सेदारी का अंतर केवल एक प्रतिशत अंक रहा, जिससे शीर्ष स्थान के लिए दोनों कंपनियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा का संकेत मिलता है।
ओपो ने 12 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। कंपनी ने 20 हजार रुपये से अधिक कीमत वाले स्मार्टफोन सेगमेंट में तीन अंकों की वृद्धि दर्ज की। हालांकि, इस श्रेणी में कंपनी के प्रदर्शन के साथ यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि उसके कम ही मॉडल अब 20 हजार रुपये से नीचे की कीमत में उपलब्ध हैं। इससे ओपो का जोर अपेक्षाकृत महंगे स्मार्टफोन बाजार पर दिखाई देता है।
शाओमी और पोको संयुक्त रूप से 12 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ चौथे स्थान पर रहे। दोनों ब्रैंड्स ने 10 हजार से 20 हजार रुपये के मूल्य वर्ग में मजबूत स्थिति बनाए रखी। पोको की सी सीरीज और रेडमी की ए सीरीज को लगातार शिपमेंट मिलने से इस प्रदर्शन को समर्थन मिला। किफायती और मध्यम कीमत वाले स्मार्टफोन बाजार में इन ब्रैंड्स की मौजूदगी बनी हुई है।
भारत के शीर्ष पांच स्मार्टफोन ब्रैंड्स में ऐपल ने भी अपनी जगह कायम रखी। कंपनी की बाजार हिस्सेदारी आठ प्रतिशत रही। रिपोर्ट के अनुसार, आईफोन 18 प्रो सीरीज की शुरुआत मजबूत रही और इसकी शुरुआती शिपमेंट पिछले साल की आईफोन 17 प्रो सीरीज की तुलना में सालाना आधार पर 20 प्रतिशत अधिक रही। यह आंकड़ा ऐपल के प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग में बढ़ोतरी को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, तीसरी तिमाही में भारतीय स्मार्टफोन बाजार पर बढ़ती लागत और कमजोर मांग का दबाव रहा, लेकिन अलग-अलग कंपनियों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। सैमसंग ने बाजार हिस्सेदारी के आधार पर पहला स्थान हासिल किया, जबकि Ai+ ने 306 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सबसे तेज रफ्तार दिखाई। वीवो, ओपो, शाओमी, पोको और ऐपल की स्थिति भी बाजार में अलग-अलग मूल्य वर्गों और उत्पाद श्रेणियों की मांग को दर्शाती है।
