इन सुरक्षा सुविधाओं का उद्देश्य केवल स्पैम कॉल या संदिग्ध संदेश की पहचान करना नहीं है, बल्कि ठगी की आशंका सामने आने पर यूजर को समय रहते सतर्क करना भी है। कुछ स्थितियों में फोन संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कदम उठाने में मदद करेगा। हालांकि, इन सुविधाओं की उपलब्धता और काम करने का तरीका संबंधित फीचर तथा डिवाइस पर निर्भर करेगा।
गूगल अपने मैसेज ऐप में Enhanced Protection मोड भी ला रहा है। यह ऑप्ट-इन सुविधा होगी, यानी यूजर अपनी इच्छा से इसे चालू कर सकेंगे। इसमें मौजूद Gemini आधारित तकनीक बातचीत के दौरान संभावित धोखाधड़ी के संकेत पहचानने का प्रयास करेगी। यदि सिस्टम को लगे कि कोई व्यक्ति संदेशों के जरिए यूजर को जाल में फंसाने की कोशिश कर रहा है, तो स्क्रीन पर चेतावनी दिखाई दे सकती है। इसके बाद यूजर बातचीत जारी रखने या संबंधित संदेश की रिपोर्ट करके नंबर को ब्लॉक करने का विकल्प चुन सकेगा।
यह सुरक्षा संदिग्ध वेबसाइटों के लिंक पर भी काम करेगी। यदि किसी संदेश में फिशिंग या मालवेयर से जुड़ा जोखिम पैदा करने वाला लिंक मिलता है, तो सिस्टम यूजर को उस पर क्लिक करने से पहले चेतावनी दे सकता है। इसका मकसद ऐसी वेबसाइटों तक पहुंचने से पहले लोगों को सावधान करना है, जिनका इस्तेमाल व्यक्तिगत जानकारी या वित्तीय विवरण चुराने के लिए किया जा सकता है।
इन सुविधाओं में गोपनीयता का भी ध्यान रखा गया है। गूगल के अनुसार, सुरक्षा से जुड़े कुछ AI फीचर डिवाइस पर मौजूद Gemini Nano मॉडल की मदद से काम करेंगे। जरूरत पड़ने पर Private AI Compute का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि इस व्यवस्था में यूजर की निजी जानकारी की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी और उसे इस तरह सुरक्षित रखा जाएगा कि कंपनी भी व्यक्तिगत सामग्री तक सीधे पहुंच न बना सके।
स्क्रीन शेयरिंग के जरिए होने वाली ठगी रोकने के लिए भी सुरक्षा उपायों का विस्तार किया जा रहा है। कई बार अपराधी बैंक कर्मचारी या तकनीकी सहायता देने वाला व्यक्ति बनकर लोगों को फोन की स्क्रीन साझा करने के लिए मना लेते हैं। इससे वे निजी जानकारी या संवेदनशील गतिविधियां देख सकते हैं। एंड्रॉयड में पहले से स्क्रीन शेयरिंग के दौरान कुछ निजी जानकारी छिपाने की सुविधा मौजूद है। अब इस सुरक्षा व्यवस्था को Google Chrome और Android WebView तक भी विस्तारित किया जा रहा है।
कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए होने वाली धोखाधड़ी रोकने के लिए भी बदलाव किए जा रहे हैं। ठग कई बार लोगों से फोन के डायल पैड पर विशेष MMI कोड दर्ज करवाकर कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय कराने की कोशिश करते हैं। इससे आने वाली कॉल किसी दूसरे नंबर पर पहुंच सकती हैं। नए सुरक्षा उपायों के तहत एंड्रॉयड ऐप्स को यूजर की जानकारी के बिना कॉल फॉरवर्डिंग चालू करने से रोकने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे कोड दर्ज करने पर नई सेटिंग लागू होने से पहले चेतावनी भी दिखाई जा सकती है।
फर्जी बैंक कॉल की पहचान के लिए गूगल बैंकों के साथ मिलकर काम कर रहा है। साइबर अपराधी Caller ID Spoofing के जरिए अपने नंबर को किसी बैंक या संस्थान के आधिकारिक नंबर जैसा दिखा सकते हैं। इससे लोगों को कॉल असली होने का भ्रम हो सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था में बैंक के नाम से आने वाली कॉल की वास्तविकता को बैंक के साथ रियल टाइम में जांचने का प्रयास किया जाएगा, ताकि यूजर को पता चल सके कि कॉल वास्तव में संबंधित बैंक की ओर से है या नहीं। इस सुविधा को अधिक देशों में उपलब्ध कराने के लिए अन्य बैंकों के साथ भी सहयोग बढ़ाया जा रहा है।
गूगल इस साल के अंत तक अन्य मोबाइल कंपनियों के साथ मिलकर ऑन-डिवाइस सुरक्षा सुविधाओं का विस्तार करने पर भी काम कर रहा है। इन बदलावों का उद्देश्य संदिग्ध संदेशों, फर्जी कॉल, खतरनाक लिंक और फोन की सेटिंग के दुरुपयोग से जुड़े जोखिमों को कम करना है।
