नई दिल्ली ।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते का निष्पादन वैश्विक व्यापार और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के हित में होगा। उनके अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत अब अंतिम चरण के करीब पहुंचती दिखाई दे रही है। ऐसे में समझौते को जल्द पूरा करना दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीतारमण ने यह बात बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों से इतर अटलांटिक काउंसिल के साथ बातचीत के दौरान कही। उन्होंने संकेत दिया कि व्यापार समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार चर्चा हो रही है और इसके जल्द हस्ताक्षर के लिए तैयार होने की उम्मीद है।
वित्त मंत्री ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के हालिया बयान का भी उल्लेख किया। गोयल ने एक-दो दिन पहले उम्मीद जताई थी कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता जल्द हस्ताक्षर के लिए तैयार हो सकता है। इससे पहले उन्होंने बताया था कि समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप दिया जा चुका है और फिलहाल उसका कानूनी मसौदा तैयार किया जा रहा है।
गोयल के अनुसार, समझौते को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि भारत को समान प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में पर्याप्त प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिले। इस रुख से स्पष्ट है कि समझौते को आगे बढ़ाने के साथ भारत अपने आर्थिक और व्यापारिक हितों को भी ध्यान में रख रहा है।
गोयल के अनुसार, समझौते को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि भारत को समान प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में पर्याप्त प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिले। इस रुख से स्पष्ट है कि समझौते को आगे बढ़ाने के साथ भारत अपने आर्थिक और व्यापारिक हितों को भी ध्यान में रख रहा है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी पक्ष की ओर से भी सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को कहा था कि प्रस्तावित समझौते का व्यापक ढांचा तैयार हो चुका है और दोनों देश इसे अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में यह बात कही थी।
व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था विभिन्न अनिश्चितताओं से गुजर रही है। ऐसे माहौल में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, समझौते की अंतिम शर्तों और इसके लागू होने की तारीख को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
बातचीत के दौरान सीतारमण ने भारत की आर्थिक वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश अपनी विकास दर बनाए रखने में सफल रहा है। उनके अनुसार, कोविड महामारी के बाद पिछले चार से पांच वर्षों के दौरान भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा है।
वित्त मंत्री ने इस प्रदर्शन का श्रेय समावेशी विकास नीतियों, कौशल विकास में निवेश और वित्तीय अनुशासन को दिया। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर अपनी जिम्मेदारी समझती है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की सहायता करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ सरकारी खर्च को अनुशासित बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
सीतारमण ने बुनियादी ढांचे के विकास में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय की भूमिका पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, इस खर्च से देश में आधारभूत सुविधाओं के निर्माण को गति मिली है और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर इसका व्यापक गुणक प्रभाव पड़ा है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने की उनकी अपील के साथ आर्थिक विकास, वित्तीय अनुशासन और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा से जुड़े मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहे।
