नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में अपनी कहानी से ज्यादा अपने संगीत के लिए याद की जाती हैं। 1990 में रिलीज हुई रोमांटिक म्यूजिकल फिल्म आशिकी भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल है। फिल्म के 11 गानों ने उस दौर में दर्शकों और संगीत प्रेमियों के बीच ऐसी लोकप्रियता हासिल की, जिसने इसके संगीत को लंबे समय तक यादगार बनाए रखा।
आशिकी में राहुल रॉय और अनु अग्रवाल मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म की रिलीज के बाद दोनों कलाकारों को बड़ी पहचान मिली। फिल्म की सफलता में इसकी कहानी के साथ-साथ संगीत की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके गाने 90 के दशक में युवाओं के बीच खास तौर पर लोकप्रिय हुए और आज भी इस एल्बम को उस दौर के चर्चित फिल्मी संगीत से जोड़ा जाता है।
फिल्म के संगीत की एक खास बात यह थी कि इसके लगभग पूरे एल्बम को प्रेम और भावनाओं से जुड़े गीतों के जरिए तैयार किया गया था। नदीम-श्रवण ने संगीत दिया था, जबकि गीतों को समीर, रानी मलिक और मदन पाल ने लिखा था। फिल्म के संगीत में गजल शैली का प्रभाव भी दिखाई देता है, जिसने इसके गीतों को उस समय के दूसरे फिल्मी एल्बम से अलग पहचान दी।
आशिकी के एल्बम की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जाता है कि इसकी दो करोड़ से ज्यादा यूनिट बिकने की बात कही जाती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बिक्री इतनी अधिक थी कि एक करोड़ से ज्यादा यूनिट बिकने के बाद गिनती रोक दी गई थी। इस वजह से आशिकी का साउंडट्रैक 1990 के दशक के सबसे चर्चित और बेहद ज्यादा बिकने वाले फिल्मी एल्बमों में गिना जाता है।
कुमार सानू की आवाज इस एल्बम की सबसे बड़ी पहचान बनी। उन्होंने फिल्म के कई लोकप्रिय गीतों को अपनी आवाज दी। जान-ए-जिगर जानमन, मैं दुनिया भुला दूंगा, एक सनम चाहिए आशिकी के लिए, नजर के सामने, तू मेरी जिंदगी है, दिल का आलम, अब तेरे बिन और धीरे धीरे से मेरी जिंदगी में आना जैसे गीतों में उनकी आवाज सुनाई दी। कुछ गीतों में अनुराधा पौडवाल ने भी उनके साथ गायन किया।
एल्बम के एक प्रमुख गीत मेरा दिल तेरे लिए में उदित नारायण और अनुराधा पौडवाल की आवाज सुनाई दी। अलग-अलग गायकों की आवाज और संगीतकारों की धुनों ने पूरे एल्बम को विविधता दी। इसके बावजूद कुमार सानू की आवाज आशिकी के संगीत से सबसे ज्यादा जुड़कर सामने आई और इस फिल्म के बाद उनके करियर को भी नई पहचान मिली।
फिल्म की कहानी राहुल और अनु की प्रेम कहानी पर आधारित थी। राहुल अपने पिता की दूसरी शादी से नाराज होकर घर में हंगामा करता है और पुलिस स्टेशन पहुंचता है। इसी दौरान अनु भी हॉस्टल से भागकर पुलिस के पास पहुंचती है। दोनों की मुलाकात धीरे-धीरे प्रेम में बदल जाती है।
राहुल अनु को मॉडलिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ाने की कोशिश करता है और उसके लिए अपने करियर की दिशा भी बदलता है। दोनों के जीवन में आगे बढ़ते हुए गलतफहमियां पैदा होती हैं, लेकिन कहानी अंततः उनके रिश्ते को फिर से जोड़ देती है। फिल्म की कहानी और संगीत के मेल ने आशिकी को 90 के दशक की यादगार रोमांटिक फिल्मों में अलग स्थान दिलाया।
