नई दिल्ली। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की अक्टूबर में प्रस्तावित पाकिस्तान यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर पाकिस्तान की तैयारियों का एक कथित गोपनीय दस्तावेज सामने आया है। दस्तावेज के मुताबिक, पाकिस्तान मालदीव को अपने इस्तेमाल किए हुए सैन्य विमान देने के प्रस्ताव पर काम कर रहा है। इसके अलावा मालदीव की वायुसेना के लिए बुनियादी ढांचा, प्रशिक्षण, तकनीकी और वित्तीय सहायता देने की योजना भी प्रस्तावित है।
दस्तावेज में इस पूरे प्रयास को दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध मजबूत करने की दिशा में उठाए जाने वाले कदम के तौर पर बताया गया है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों ने इसके रणनीतिक प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं।
13 अगस्त की चिट्ठी में क्या है?
दावे के मुताबिक, 13 अगस्त 2026 को पाकिस्तान स्थित मालदीव के उच्चायोग ने रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान रक्षा मंत्रालय को एक गोपनीय पत्र भेजा। इस पत्र की जानकारी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, सेना मुख्यालय और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई गई।
दस्तावेज के अनुसार, 20 से 22 अक्टूबर के बीच मालदीव के साथ एक बड़ी सैन्य डील को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर समेत संबंधित विभाग इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में बताए गए हैं।
पत्र में यह सुझाव भी दिया गया है कि यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा के दौरान समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर की घोषणा की जा सकती है।
सैन्य विमान के साथ ट्रेनिंग और तकनीकी मदद का प्रस्ताव
गोपनीय दस्तावेज में केवल सैन्य विमान उपलब्ध कराने की बात ही नहीं है। प्रस्ताव में मालदीव की वायुसेना के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करने, प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और तकनीकी सहायता देने का भी उल्लेख है।
इसके साथ वित्तीय सहयोग की संभावना भी बताई गई है। यानी पाकिस्तान का प्रस्ताव केवल सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि मालदीव के रक्षा ढांचे में अपनी भूमिका बढ़ाने की दिशा में भी देखा जा रहा है।
रक्षा विशेषज्ञ ने भारत की सुरक्षा से जोड़ा मामला
रक्षा मामलों के जानकार कर्नल सीबी भगत का कहना है कि भारत और मालदीव के बीच पहले से अच्छे संबंध हैं। उनके मुताबिक, ऐसे में पाकिस्तान की ओर से मालदीव के साथ सैन्य उपकरणों की डील की कोशिश को केवल सामान्य रक्षा सहयोग के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
उनका मानना है कि हिंद महासागर में भारत के बेहद करीब स्थित मालदीव की वायुसेना में पाकिस्तानी सैन्य विमानों की मौजूदगी क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को प्रभावित कर सकती है। भगत के अनुसार, इसके पीछे भारत के लिए रणनीतिक चुनौती पैदा करने की कोशिश हो सकती है।
पाकिस्तान खुद चीन पर कितना निर्भर?
पाकिस्तान के रक्षा क्षेत्र की अपनी सीमाएं भी इस प्रस्ताव के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। रक्षा उत्पादन के मामले में पाकिस्तान का सैन्य औद्योगिक ढांचा सीमित है और वह अपने प्रमुख हथियारों की जरूरत के लिए चीन पर काफी निर्भर है।
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच पाकिस्तान के प्रमुख हथियारों के आयात में चीन की हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत रही।
ऐसे में मालदीव को सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने की पाकिस्तान की कोशिश को क्षेत्रीय रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव का वास्तविक स्वरूप और दोनों देशों के बीच अंतिम समझौता होने की स्थिति आगे की बातचीत पर निर्भर करेगी।
मुइज्जू की अक्टूबर यात्रा पर नजर
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की अक्टूबर में प्रस्तावित पाकिस्तान यात्रा इस पूरे घटनाक्रम के लिहाज से अहम मानी जा रही है। यदि रक्षा सहयोग को लेकर सहमति बनती है, तो यात्रा के दौरान किसी समझौते या MoU की घोषणा की संभावना जताई गई है।
फिलहाल सामने आए दस्तावेज में प्रस्तावित रक्षा सहयोग की जानकारी है। इसे अंतिम सैन्य समझौता मानने से पहले दोनों देशों की आधिकारिक पुष्टि और आगे की कार्रवाई का इंतजार करना होगा।
