कुछ बीमारियों में आनुवंशिक संबंध अपेक्षाकृत स्पष्ट माना जाता है। उदाहरण के तौर पर कुछ परिवारों में कम उम्र में बहुत ज्यादा कोलेस्ट्रॉल की समस्या या हार्ट अटैक का इतिहास देखने को मिलता है। ऐसी स्थिति को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया एक ऐसी आनुवंशिक स्थिति है जिसमें खराब कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल का स्तर बहुत ज्यादा हो सकता है। इसके कारण कम उम्र में कोरोनरी हार्ट डिजीज और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए यदि परिवार में किसी सदस्य को कम उम्र में हार्ट अटैक हुआ है या किसी करीबी व्यक्ति का बैड कोलेस्ट्रॉल लगातार बहुत ज्यादा रहता है तो परिवार के दूसरे सदस्यों को भी डॉक्टर से सलाह लेकर जांच कराने पर विचार करना चाहिए।
कैंसर के मामले में भी पारिवारिक इतिहास महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि हर कैंसर आनुवंशिक नहीं होता और परिवार में किसी सदस्य को कैंसर होने का मतलब यह नहीं कि दूसरे सदस्य को भी कैंसर जरूर होगा। लेकिन कुछ आनुवंशिक बदलाव विशेष प्रकार के कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। BRCA1 और BRCA2 जैसे आनुवंशिक बदलाव वंशानुगत स्तन और अंडाशय कैंसर सिंड्रोम से जुड़े पाए गए हैं। इसी तरह लिंच सिंड्रोम कोलोरेक्टल और कुछ अन्य कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा है। ऐसे मामलों में परिवार की मेडिकल हिस्ट्री को डॉक्टर के साथ साझा करना महत्वपूर्ण हो जाता है।
डायबिटीज को लेकर भी परिवार का इतिहास एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक हो सकता है। अगर माता पिता या भाई बहन में डायबिटीज रही है तो व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। लेकिन केवल आनुवंशिक जोखिम के कारण बीमारी होना तय नहीं होता। वजन खानपान शारीरिक गतिविधि और रोजमर्रा की जीवनशैली भी जोखिम को प्रभावित कर सकती है। इसलिए परिवार में बीमारी होने पर घबराने के बजाय अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना अधिक जरूरी है।
डायबिटीज को लेकर भी परिवार का इतिहास एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक हो सकता है। अगर माता पिता या भाई बहन में डायबिटीज रही है तो व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। लेकिन केवल आनुवंशिक जोखिम के कारण बीमारी होना तय नहीं होता। वजन खानपान शारीरिक गतिविधि और रोजमर्रा की जीवनशैली भी जोखिम को प्रभावित कर सकती है। इसलिए परिवार में बीमारी होने पर घबराने के बजाय अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना अधिक जरूरी है।
विशेषज्ञों की सलाह के मुताबिक परिवार में गंभीर बीमारी की हिस्ट्री हो तो डॉक्टर को इसकी जानकारी जरूर दें। डॉक्टर आपकी उम्र स्वास्थ्य स्थिति और पारिवारिक इतिहास को ध्यान में रखते हुए जरूरी जांच या स्क्रीनिंग की सलाह दे सकते हैं। कुछ मामलों में जेनेटिक काउंसलिंग भी उपयोगी हो सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बीमारी के पारिवारिक इतिहास को डर की वजह न बनाएं बल्कि इसे समय रहते सावधान होने का संकेत समझें। नियमित स्वास्थ्य जांच संतुलित खानपान पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्क्रीनिंग अपनाकर कई जोखिमों को समय पर पहचाना और नियंत्रित किया जा सकता है।
