नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) सहित विभिन्न परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में व्यापक प्रशासनिक बदलाव किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने एजेंसी से 47 अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय लिया है। इनमें से कुछ के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी प्रस्तावित है।
यह कार्रवाई उच्च शिक्षा विभाग में हालिया प्रशासनिक फेरबदल के बाद की गई है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है। इसके लिए एनटीए के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
चार नए जनरल मैनेजर की होगी नियुक्ति
एनटीए में अब चार नए जनरल मैनेजर की सीधी नियुक्ति की जाएगी। ये अधिकारी एजेंसी के विभिन्न प्रमुख विभागों का संचालन संभालेंगे। इसके साथ ही आउटसोर्सिंग आधारित व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर विशेषज्ञ अधिकारियों की नियुक्ति पर जोर दिया जा रहा है।
16 यंग प्रोफेशनल्स भी होंगे शामिल
एजेंसी की कार्यप्रणाली को आधुनिक और पेशेवर बनाने के उद्देश्य से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के प्रतिभा सेतु पोर्टल के माध्यम से 16 यंग प्रोफेशनल्स की नियुक्ति की जाएगी। इनकी तैनाती प्रारंभिक तौर पर अकादमिक, विधिक (लीगल) और वित्त (फाइनेंस) से जुड़े विभागों में की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि युवा पेशेवर परीक्षा प्रबंधन में नई तकनीक और बेहतर प्रक्रियाओं को लागू करने में योगदान देंगे।
समिति की सिफारिशों पर अमल
सरकार यह पुनर्गठन प्रो. के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के आधार पर कर रही है। समिति ने परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए कई सुझाव दिए थे।
राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं कराता है एनटीए
एनटीए देश में नीट, जेईई, सीयूईटी सहित 15 से 20 प्रमुख राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन करता है। हाल के वर्षों में सामने आए पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के बाद परीक्षा प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि परीक्षा संबंधी अपराधों पर रोक लगाने के लिए कड़े कानूनी प्रावधानों को भी लागू किया जा रहा है। इसके तहत परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
