अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के साथ ही मरीज का उपचार शुरू किया, लेकिन कुछ ही देर में उसकी हालत तेजी से बिगड़ गई। चिकित्सकों ने कार्डियक अरेस्ट के बाद हृदय को दोबारा सक्रिय करने के लिए आवश्यक सभी मानक प्रक्रियाएं अपनाईं। कई बार इलेक्ट्रिक शॉक देने सहित अन्य आपातकालीन उपाय किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। इसके बाद विशेषज्ञों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्नत लाइफ सपोर्ट तकनीकों का सहारा लेने का निर्णय लिया।
मरीज को ऐसी मशीन से जोड़ा गया जिसने अस्थायी रूप से उसके दिल और फेफड़ों का कार्य संभाल लिया। यह प्रणाली शरीर से रक्त निकालकर उसमें ऑक्सीजन मिलाती है और फिर उसे वापस शरीर में पहुंचाती है, जिससे आवश्यक अंगों तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति बनी रहती है। इसके साथ एक अन्य सहायक उपकरण का उपयोग भी किया गया, जिससे हृदय पर दबाव कम रखने और रक्त संचार को स्थिर बनाए रखने में सहायता मिली। इन आधुनिक तकनीकों के कारण मरीज के शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को लगातार ऑक्सीजन मिलती रही।
करीब 40 घंटे तक मरीज का शरीर पूरी तरह इन लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। इस दौरान डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी स्थिति पर नजर रखती रही और आवश्यक चिकित्सकीय बदलाव करती रही। लंबे समय तक हृदय की सामान्य धड़कन वापस न आने के बावजूद इलाज जारी रखा गया। आखिरकार लगभग दो दिन बाद मरीज के हृदय ने स्वयं दोबारा काम करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसकी धड़कन सामान्य होने लगी और शरीर ने उपचार के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया।
आगे की जांच में चिकित्सकों ने पाया कि मरीज गंभीर मायोकार्डाइटिस यानी हृदय की मांसपेशियों में सूजन से पीड़ित था। यह बीमारी कई मामलों में तेजी से हृदय की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है और समय पर उपचार न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के मामलों में शीघ्र पहचान, लगातार निगरानी और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
लगातार इलाज और निगरानी के बाद मरीज की स्थिति में सुधार होता गया। लगभग तीन सप्ताह अस्पताल में रहने के बाद उसे स्वस्थ अवस्था में छुट्टी दे दी गई। चिकित्सकों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञों की त्वरित निर्णय क्षमता और समय पर मिले उपचार ने इस चुनौतीपूर्ण मामले को सफल परिणाम तक पहुंचाया। यह घटना बताती है कि गंभीर कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थिति में भी उचित चिकित्सा सुविधाएं, आधुनिक उपकरण और निरंतर चिकित्सकीय प्रयास कई बार असंभव लगने वाली परिस्थितियों को भी सकारात्मक परिणाम में बदल सकते हैं। ऐसी घटनाएं स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी प्रगति और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था के महत्व को भी स्पष्ट रूप से सामने लाती हैं।
