नई दिल्ली । CJP के संसद मार्च के दौरान हुई झड़प और पुलिस कार्रवाई के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों से मिलने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा मंगलवार को दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती छात्रों का हालचाल जाना और उनके उपचार में लगे चिकित्सकों से भी बातचीत की। इससे पहले प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा की जा चुकी थी। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मुलाकात की और उनका हाल जाना।
संसद मार्च के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया। इस दौरान लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की घटनाएं सामने आईं, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। पुलिस के अनुसार झड़प के दौरान कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं। घटनास्थल के आसपास कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ की भी सूचना मिली, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई।
घटना के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। कांग्रेस ने प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि युवाओं की मांगों को सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार से जवाब मांगा और कहा कि ऐसे मामलों पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।
दूसरी ओर सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से बातचीत की पहल की गई है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगों को सुना था। इसके बाद अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मुलाकात को सरकार की ओर से संवाद और स्थिति की समीक्षा के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि यह कदम घटना के बाद उठाया गया, जबकि शुरुआत में सरकार की प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं थी।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी परीक्षा से जुड़े विवादों और अनियमितताओं के मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा जताया है। सरकार का कहना है कि युवाओं के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं विपक्ष लगातार इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद मार्च के बाद उत्पन्न स्थिति ने एक बार फिर छात्र आंदोलनों, लोकतांत्रिक विरोध और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। सरकार और विपक्ष दोनों इस मुद्दे पर अपने-अपने पक्ष को मजबूती से रख रहे हैं, जबकि घायल प्रदर्शनकारियों के उपचार और पूरे घटनाक्रम की जांच भी जारी है। आने वाले दिनों में इस विषय पर संसद और राजनीतिक मंचों पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।
