सरकार आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन में प्रस्तुत करेगी, जिसके माध्यम से पहले जारी अध्यादेश का स्थान लेने वाला स्थायी कानून बनाया जाएगा। इस प्रस्ताव का उद्देश्य विदेशी निवेश को आकर्षित करना, सरकारी ऋण बाजार को अधिक मजबूत बनाना तथा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच वित्तीय बाजार में स्थिरता और तरलता बनाए रखना है। सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के विश्वास को बढ़ाने और भारतीय अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध कराने में सहायक होगी।
मानसून सत्र में सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 भी पेश किया जाएगा। इस विधेयक के तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का तर्क है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के निस्तारण की गति तेज होगी और न्यायिक प्रणाली पर बढ़ते कार्यभार को कम करने में मदद मिलेगी।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से एमएसएमई क्षेत्र में कारोबार को और सरल बनाने का प्रयास किया जाएगा। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य भरोसे पर आधारित नियामकीय व्यवस्था विकसित करना, भुगतान में देरी से जुड़े विवादों के समाधान की प्रक्रिया को मजबूत करना तथा राज्यों को अधिक प्रशासनिक अधिकार प्रदान करना है। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से छोटे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा।
जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए विलंबित पंजीकरण से जुड़े नियमों को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय सम्मान के विरुद्ध होने वाले कृत्यों पर अधिक कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किए जाने की योजना है। सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य कानूनों को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाना है।
इन नए विधेयकों के अलावा सरकार संसद में पहले से लंबित कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी चर्चा आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी। साथ ही अनुपूरक अनुदानों की मांग पर भी दोनों सदनों में विचार और मतदान कराया जाएगा। 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक बहस होने की संभावना है। सत्र शुरू होने से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक और विपक्षी दलों की रणनीतिक बैठकों के बाद संसद की कार्यवाही राजनीतिक और विधायी दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण रहने की उम्मीद है।
