नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में ‘शोमैन’ के नाम से विख्यात दिग्गज अभिनेता और निर्देशक राज कपूर अपनी बेहतरीन फिल्मों के साथ-साथ सह-कलाकारों के साथ अपने संबंधों को लेकर भी सदैव चर्चा में रहे। जहां एक ओर फिल्म उद्योग की अधिकांश अभिनेत्रियां उनके साथ काम करने के अवसर तलाशती थीं, वहीं दूसरी ओर साठ के दशक की शीर्ष और बेहद खूबसूरत अभिनेत्री साधना शिवदसानी के साथ उनके रिश्तों में एक ऐसी तल्खी आई जो जीवनभर बरकरार रही। फिल्मी गलियारों में यह बात आज भी बेहद चर्चा का विषय रहती है कि अपनी बेमिसाल खूबसूरती और अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली साधना, राज कपूर के एक विशेष व्यवहार के कारण उनसे अत्यधिक नाराज थीं और उन्होंने जीवन में दोबारा कभी उनके साथ स्क्रीन साझा नहीं की।
साधना ने इस व्यवहार को अपने काम और समय का अनादर समझा और इसी स्वाभिमान के चलते उन्होंने निर्णय लिया कि वह भविष्य में कभी भी राज कपूर के साथ किसी भी फिल्म में काम नहीं करेंगी। यद्यपि इस तल्खी को लेकर दोनों ही कलाकारों ने कभी सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया और न ही इसके कोई लिखित पुख्ता प्रमाण मिलते हैं, परंतु इसके बाद का फिल्मी इतिहास गवाह है कि इस सुपरहिट जोड़ी को दोबारा किसी फिल्म निर्माता ने एक साथ साइन नहीं किया। दोनों ने अपने पूरे करियर में मुख्य भूमिकाओं के रूप में केवल इसी एक फिल्म में साथ काम किया।
दिलचस्प बात यह है कि व्यावसायिक रूप से ‘दूल्हा दुल्हन’ बॉक्स ऑफिस पर एक बेहद सफल फिल्म साबित हुई थी और इसके मधुर गीत आज भी संगीत प्रेमियों द्वारा बेहद पसंद किए जाते हैं। बहुत कम लोग इस ऐतिहासिक तथ्य से परिचित हैं कि इस मुख्य फिल्म से कई वर्ष पूर्व, जब साधना मात्र 15-16 वर्ष की थीं और एक स्थानीय डांस स्कूल में नृत्य की शिक्षा ले रही थीं, तब उन्होंने राज कपूर की कालजयी फिल्म ‘श्री 420’ के प्रसिद्ध गीत ‘मुड़ मुड़ के न देख’ में एक साधारण बैकग्राउंड डांसर के रूप में काम किया था। उस समय किसी ने यह नहीं सोचा था कि पृष्ठभूमि में नाचने वाली यही बच्ची आगे चलकर बॉलीवुड की सबसे बड़ी स्टार बनेगी और शोमैन के सामने अपने सिद्धांतों के लिए खड़ी होगी।
मध्य प्रदेश सहित देश भर के पुराने सिनेमा प्रेमी आज भी इन दोनों कलाकारों के अभिनय और उनके बीच की इस मूक असहमति को बॉलीवुड के स्वर्णिम युग की एक अनसुनी दास्तान के रूप में याद करते हैं। साधना का यह कड़ा रुख यह स्पष्ट करता है कि उस दौर की अभिनेत्रियां न केवल अपने स्टारडम बल्कि अपने आत्मसम्मान और कार्यस्थल पर व्यावसायिकता को लेकर कितनी सजग थीं, भले ही सामने फिल्म उद्योग का सबसे बड़ा नाम ही क्यों न खड़ा हो। राज कपूर के साथ दोबारा काम न करने के फैसले के बावजूद साधना ने अपने दौर के अन्य सभी सुपरस्टार्स के साथ एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं और हिंदी सिनेमा में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया।
