
-श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल समूह उत्तर प्रदेश में करेगा स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
-बच्चों के हृदय रोग उपचार को मिलेगी प्राथमिकता, जांच-दवा भी होगी मुफ्त
-वाराणसी में नए केंद्र के लिए भूमि की तलाश जारी, अगस्त में भूमि पूजन की तैयारी
वाराणसी। आर्थिक अभाव के कारण कोई भी व्यक्ति उपचार से वंचित न रहे, इसी उद्देश्य के साथ श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल समूह उत्तर प्रदेश में अपनी स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने जा रहा है। संस्थान के चेयरमैन डॉ. सी. श्रीनिवास ने बताया कि वाराणसी में प्रस्तावित नए केंद्र में मरीजों को पूरी तरह निःशुल्क चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है, जहां उपचार का आधार आर्थिक क्षमता नहीं बल्कि आवश्यकता होगी।
उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में छोटे बच्चों के हृदय रोगों के उपचार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श, आवश्यक जांच और दवाएं भी बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जाएंगी। अस्पताल में पर्ची, जांच, दवा या उपचार के लिए किसी प्रकार की बिलिंग व्यवस्था नहीं होगी।
डॉ. श्रीनिवास के अनुसार संस्थान केवल अस्पताल निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने का लक्ष्य रखता है, जिसमें मरीज और उसके परिवार को इलाज के दौरान आर्थिक चिंता का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि सेवाओं का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा और भविष्य में इमरजेंसी सेवाओं सहित अन्य चिकित्सा सुविधाओं को भी जोड़ा जाएगा।
संस्थान वर्तमान में वाराणसी में उपयुक्त भूमि और बड़े परिसर की तलाश कर रहा है। जुलाई तक इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है, जबकि अगस्त में भूमि पूजन कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।
वर्ष 2012 में नई रायपुर से शुरू हुए श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल समूह का संचालन पूरी तरह निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा मॉडल पर आधारित है। संस्थान के अनुसार 10 जून 2026 तक देश और विदेश से 3.78 लाख से अधिक मरीज पंजीकृत हो चुके हैं तथा 42 हजार से अधिक कार्डियक उपचार किए जा चुके हैं।
संस्थान के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश से आने वाले मरीजों की संख्या सर्वाधिक रही है। राज्य से अब तक एक लाख से अधिक ओपीडी मरीज और 11 हजार से अधिक कार्डियक सर्जरी मरीज पंजीकृत हुए हैं। नई रायपुर केंद्र में बच्चों के हृदय उपचार के लिए आने वाले मरीजों में भी उत्तर प्रदेश की बड़ी हिस्सेदारी है।
संस्थान का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे अधिक जनसंख्या वाले राज्यों में जन्मजात हृदय रोग तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को देखते हुए निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार समाज के व्यापक हित में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
